नई दिल्ली, 30 अक्तूबर (अशोक “अश्क”)
बॉलीवुड में कई निर्देशक और प्रोड्यूसर अपनी फिल्मों में म्यूजिक के अनोखे प्रयोग करते रहे हैं। यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा भी इस मामले में विशेष रहे। यश चोपड़ा की हर फिल्म म्यूजिकल रही, वहीं संगीतकार मदन मोहन और आरडी बर्मन ने म्यूजिक में नए प्रयोग किए। मदन मोहन की दो फिल्मों में एक ही गाने की धुन का प्रयोग हुआ, जो दर्शकों के लिए यादगार साबित हुआ।

मौसम (1975) और वीर-जारा (2004) ऐसी फिल्में हैं। मौसम में चार गाने थे, जिनमें ‘दिल ढूंढता है, फिर वही, फुरसत के रात-दिन’ को दो बार रखा गया था। इस गाने की धुन गुलजार और मदन मोहन ने तैयार की थी। यह गाना मिर्जा गालिब की गजल से प्रेरित था। मौसम में शर्मिला टैगोर और संजीव कुमार मुख्य भूमिका में थे। फिल्म ने सेकंड बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड, शर्मिला टैगोर को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड और गुलजार को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया।

30 साल बाद, यश चोपड़ा की फिल्म वीर-जारा में मदन मोहन की वही धुन नए अंदाज में पेश की गई। जावेद अख्तर ने गाने के बोल ‘तेरे लिए हम हैं जिए, हर आंसू पिए…’ लिखे। इसे लता मंगेशकर और रूप कुमार राठौर ने गाया। वीर-जारा के 11 गाने क्लासिकल रोमांटिक फीलिंग के लिए जाने गए। फिल्म ने 97 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया और 30 से अधिक अवॉर्ड्स जीते।
इस तरह, मदन मोहन की 30 साल पुरानी धुनें आज भी भारतीय सिनेमा में अपनी जगह बनाए हुए हैं। यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा के प्रयास ने इसे नई पीढ़ी के दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।

