नई दिल्ली, 3 नवंबर (अशोक “अश्क”) देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि इस साइबर घोटाले पर अभी कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो यह “बहुत गंभीर रूप” ले सकता है।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “यह चौंकाने वाली बात है कि पीड़ितों से अब तक करीब 3000 करोड़ रुपये ठगे जा चुके हैं। यह रकम सिर्फ भारत में वसूली गई है। अगर हम इसे नजरअंदाज करते हैं और कड़े आदेश नहीं देते, तो समस्या और बढ़ जाएगी। हम इससे सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस घोटाले के शिकार ज्यादातर बुजुर्ग नागरिक हैं, जो इसे और अधिक संवेदनशील मामला बनाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार 17 अक्टूबर 2025 को इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था, जब हरियाणा के अंबाला की 70 वर्षीय महिला ने कोर्ट को पत्र लिखा था। महिला ने बताया कि कैसे ठगों ने सीबीआई, ईडी और न्यायिक अधिकारियों का भेष धारण कर उनसे और उनके पति से 1.5 करोड़ रुपये ऐंठ लिए।
ठगों ने बुजुर्ग दंपति से फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश दिखाए और धन शोधन निवारण अधिनियम के नाम पर बैंक खातों को ज़ब्त करने के फर्जी दस्तावेज पेश किए। इन दस्तावेजों पर मुंबई के प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी की जाली मुहर और न्यायिक हस्ताक्षरों वाले फर्जी आदेश भी शामिल थे।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार, हरियाणा पुलिस और सीबीआई से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि आमतौर पर वह केवल जांच में तेजी लाने का निर्देश देती है, लेकिन इस मामले में क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के नाम का दुरुपयोग किया गया है, इसलिए शीर्ष अदालत इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए कार्रवाई करेगी।

