नई दिल्ली, 03 नवम्बर (अशोक “अश्क”) पाकिस्तान ने अमेरिका को आश्वासन दिया था कि वह हमास से लड़ने के लिए 20 हजार सैनिकों को गाजा भेजेगा, लेकिन अब खबर है कि उसने प्रति सैनिक 10 हजार अमेरिकी डॉलर की मांग की है। हालांकि, इजरायल ने इसके बदले सिर्फ 100 अमेरिकी डॉलर प्रति सैनिक देने का प्रस्ताव दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों मोसाद और सीआईए के अधिकारियों के साथ पाकिस्तान सेना के शीर्ष अधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में तय हुआ था कि पाकिस्तान की सेना गाजा में हमास से हथियार छीनने के लिए 20 हजार जवानों को भेजेगी। पाकिस्तानी पत्रकार आसमा शिरजई के अनुसार, पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख असीम मुनीर ने इजरायल सरकार से प्रति सैनिक 10,000 अमेरिकी डॉलर की मांग की है। इजरायल ने इस मांग पर सिर्फ 100 अमेरिकी डॉलर प्रति सैनिक देने का ऑफर दिया है।
पिछले महीने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने मिस्र का दौरा किया था, जहां दावा किया गया था कि उनकी मोसाद और सीआईए के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद ही इजरायली प्रधानमंत्री ने अपनी कैबिनेट को बताया था कि हमास के खिलाफ गाजा में पाकिस्तान और इंडोनेशिया के सैनिकों को तैनात किया जाएगा।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख गाजा में सैनिक भेजने के लिए तैयार हो गए हैं। इन सैनिकों का काम हमास का निरस्त्रीकरण करना है, जिसका सीधा मतलब है कि इजरायल की जगह अब पाकिस्तानी सैनिक हमास से लड़ेंगे। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देता, फिर भी वह उसके लिए गाजा में लड़ने के लिए अपने सैनिक भेजेगा। इससे यह भी साफ होता है कि पाकिस्तानी सैनिक किराए के सैनिक हैं।
आलोचकों का कहना है कि जो पाकिस्तान फिलिस्तीनियों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहा था, वही अब गाजा जाकर फिलिस्तीनियों का नरसंहार करेगा। 1970 के दशक में जिया-उल हक के शासनकाल में भी ऐसा हो चुका है, जब जॉर्डन (तत्कालीन मिस्र नहीं) में हमास के आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तान की सेना ने हजारों फिलिस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया था।

