नई दिल्ली, 07 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत ने बांग्लादेश के साथ अपनी संवेदनशील और लंबी सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को भारतीय सेना ने तीन नई सैन्य छावनियों का उद्घाटन किया — असम के धुबरी के पास बामुनी, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में। ये तीनों छावनियां अब पूरी तरह ऑपरेशनल हैं और इन्हें भारतीय सेना व बीएसएफ के लिए फोर्स मल्टीप्लायर माना जा रहा है। इनका उद्देश्य 4096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूद रणनीतिक कमजोरियों को दूर करना और किसी भी संभावित घुसपैठ या आपात स्थिति में तेज प्रतिक्रिया देना है।

सामरिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है। “चिकन नेक” नाम से प्रसिद्ध यह 22 किलोमीटर चौड़ी पट्टी भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ती है। अगर कभी यह क्षेत्र दुश्मन के निशाने पर आया, तो 4.5 करोड़ से अधिक नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, नई छावनियों के साथ सीमा पर सड़क नेटवर्क, आधुनिक निगरानी प्रणालियों और संचार उपकरणों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। यह पहल भारत की बॉर्डर मॉडर्नाइजेशन ड्राइव का हिस्सा है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह सुदृढ़ीकरण ऐसे समय हुआ है जब कुछ हफ्ते पहले बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार प्रो. मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस पृष्ठभूमि में भारत का यह कदम न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि भारत अपने पूर्वी मोर्चे पर किसी भी भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति पूरी तरह तैयार है।

