गोपालगंज, 09 नवम्बर (निज संवाददाता) गंगा स्नान करने गई महिला को वहां नवजात शिशु मिलने पर गंगा मईया का वरदान मानकर घर लाई महिला के साथ गजब वाकया हो गया। नवजात को बीमार पड़ने पर उसे सदर अस्पताल लाई जहां हकीकत जानने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने दत्तक ग्रहण केंद्र को सूचित कर दिया। मौके पर पहुंची विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान ने नवजात को अपने संरक्षण में ले लिया। जिसके बाद उसे इलाज के लिए मुजफ्फपुर रेफर कर दिया गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश के तमकुही रोड स्थित शिवा घाट पर गंडक स्नान के दौरान गोपालगंज की एक महिला को एक लावारिस नवजात शिशु मिला।

महिला बच्चे को अपने साथ लेकर अपने घर आई और रविवार को उसकी हालत बिगड़ने पर सदर अस्पताल में उसे अपना बताकर भर्ती कराने की कोशिश की। लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की जानकारी मिलते ही उसने विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की टीम सक्रिय हुई और तुरंत अस्पताल पहुंचकर बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत नवजात को बेहतर इलाज के लिए मुजफ्फरपुर रेफर किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार,कुचायकोट प्रखंड के दुबे खरेया गांव निवासी गीता देवी 5 नवंबर को पूर्णिमा स्नान के लिए यूपी के कुशीनगर गई थीं।

उसी दौरान उन्हें घाट पर एक नवजात बच्चा मिला। गीता देवी ने बताया कि वहां मौजूद स्थानीय लोगों और पुलिस ने बच्चे को उन्हें सौंप दिया, जिसके बाद वह बच्चे को लेकर घर लौट आईं। उक्त महिला ने बताया कि,मेरी सात बेटियां हैं,बेटा नहीं था। मैंने सोचा उसे पाल-पोस कर बड़ा करूंगी, पढ़ाऊंगी-लिखाऊंगी। लेकिन तबियत खराब होने पर इलाज के लिए सदर अस्पताल लाई। अस्पताल में जब स्वास्थ्यकर्मियों ने उनसे बच्चे के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने पूरी बात बताई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामलें की सूचना दत्तक ग्रहण संस्थान को दी। संस्थान की टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को अपने कब्जे में लिया। इस दौरान महिला ने बच्चे को सौंपने से इनकार करते हुए अस्पताल में ही बच्चे पर अपना दावा जताया। वही महिला के समर्थन में उसके नाते रिश्तेदार जुट गए।स्थिति तनावपूर्ण होने पर नगर थाना पुलिस और डायल 112 की टीम को बुलाया गया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर महिला को समझाया और स्थिति को शांत कराया। दत्तक ग्रहण संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि लावारिस या परित्यक्त बच्चे को गोद लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया तय है। किसी भी व्यक्ति को सीधे बच्चा नहीं सौंपा जा सकता।
महिला को बताया गया कि यदि वह बच्चे की देखभाल करना चाहती हैं, तो वह नियमों के तहत आवेदन कर ले सकती हैं। फिलहाल नवजात संस्थान की देखरेख में सुरक्षित है, और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

