नई दिल्ली, 9 नवम्बर ( अशोक “अश्क”) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की 100 साल की यात्रा पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि आरएसएस किसी व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि नीतियों का समर्थन करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना है, जबकि राजनीति समाज को बांटने का कार्य करती है।

मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस में मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य समुदायों का स्वागत है, बशर्ते वे खुद को भारत माता के पुत्र और व्यापक हिंदू समाज का हिस्सा मानें। उन्होंने कहा, “मुसलमान शाखा में आते हैं, ईसाई भी आते हैं, और हिंदू कहे जाने वाले समाज की अन्य जातियां भी आती हैं। हम किसी की गिनती या पहचान नहीं पूछते। सभी भारत माता के पुत्र हैं और संघ इसी भावना से कार्य करता है।”
भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ अपने स्वयंसेवकों को धर्म या जाति के आधार पर वर्गीकृत नहीं करता। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज को जोड़ना है, न कि राजनीतिक लाभ लेना।
राजनीतिक समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा, “हम किसी दल के साथ नहीं, बल्कि नीतियों के साथ हैं। हमने अयोध्या में राम मंदिर का समर्थन किया, इसलिए उन लोगों को वोट दिया जो इसके निर्माण के पक्ष में थे। अगर कांग्रेस ने यह काम किया होता, तो हम उनका भी समर्थन करते।”
भागवत के इस बयान को संघ के वैचारिक दृष्टिकोण की पुनर्पुष्टि माना जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखता है।

