समस्तीपुर (अशोक “अश्क”) स्वस्थ समस्तीपुर-सुंदर समस्तीपुर” का नारा नगर निगम ने तो दे दिया, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शहर के प्रमुख वार्डों में साफ-सफाई और कूड़ा प्रबंधन को लेकर दावे तो खूब किए जा रहे हैं, पर सड़कों, गलियों और चौराहों पर गंदगी के अंबार इन दावों की पोल खोल रहे हैं। स्टेशन रोड, जो शहर के बीचोंबीच स्थित है, वहां की हालत सबसे बदतर है। यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा, जलजमाव और जाम से आम लोगों और व्यापारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

रेलवे की खाली जमीन पर धीरे-धीरे कूड़ा फेंकने और सूअर पालन का काम शुरू हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि दुकान के पीछे की नाली पूरी तरह जाम हो चुकी है। हल्की बारिश में भी गंदा पानी दुकान के अंदर घुस जाता है, जिससे व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।
रामबाबू चौक से स्टेशन चौक तक रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है। सड़क किनारे बेतरतीब दोपहिया पार्किंग, दुकानों के सामने लगे प्रचार बोर्ड और कूड़े के ढेर सड़कों को और संकीर्ण बना रहे हैं। स्थानीय निवासीयों ने बताया कि प्रचार सामग्री और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण दिन में सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है।
हिन्दुस्तान बोले अभियान के तहत स्थानीय लोगों ने खुलकर नगर निगम की लापरवाही पर सवाल उठाए। एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि दुकान के पीछे की नाली जाम हो चुकी है, जिसके चलते बाजार का पानी जमा हो जाता है। इससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम राहगीरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अनिता राम (मेयर) ने कहा, स्टेशन रोड में सबसे बड़ी समस्या जाम की है। रामबाबू चौक से स्टेशन चौक तक एक जगह कचरा जमा होता है, जिसका उठाव नियमित रूप से किया जाता है। कई स्थानों पर डस्टबिन लगाए गए हैं। यदि लोग उनका सही उपयोग करें तो काफी हद तक समस्या का समाधान संभव है।
हालांकि, ज़मीनी सच्चाई यह है कि नगर निगम की व्यवस्था फिलहाल नारे से आगे नहीं बढ़ पाई है।

