नई दिल्ली, 30 नवम्बर (अशोक “अश्क”) आज भी किसी शादी में या रेडियो पर जैसे ही “सलाम-ए-इश्क मेरी जान, ज़रा कबूल कर लो…” गूंजता है, माहौल में रोमांस घुल जाता है। 1978 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का यह सदाबहार गीत महज एक गाना नहीं, बल्कि बॉलीवुड के सबसे तीव्र और रहस्यमय ऑन-स्क्रीन रोमांस अमिताभ बच्चन और रेखा का अटूट प्रतीक बन चुका है। 47 वर्ष बाद भी इसका जादू उतना ही ताज़ा है।

इस गाने को स्वर दिए थे महान किशोर कुमार और सुरों की मलिका लता मंगेशकर ने। संगीतकार थे कल्याणजी–आनंदजी और बोल लिखे थे अंजान ने। बॉक्स ऑफिस इंडिया के अनुसार, फिल्म ने 18 करोड़ से अधिक की कमाई कर 1970 के दशक की तीसरी सबसे बड़ी हिट का दर्जा हासिल किया शोले और बॉबी के बाद।
गाने में रेखा के रूप में ‘जरिना’ और अमिताभ बच्चन के ‘सिकंदर’ के बीच दर्द, जुनून और बेकाबू मोहब्बत की दास्तान को पर्दे पर जिस तीव्रता से उकेरा गया, वह आज भी दर्शकों की रगों में बिजली-सी दौड़ा देता है। रेखा की आंखों का जादू और अमिताभ का बेमिसाल अंदाज़ पूरी सीक्वेंस को अमर बना देता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गीत का पूरा सीन सिर्फ एक ही टेक में शूट किया गया। दोनों कलाकार इतने इन-कैरेक्टर थे कि निर्देशक को दूसरी बार कैमरा रोल करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। यूट्यूब पर इस गीत को आज 100 मिलियन से ज्यादा व्यूज़ मिल चुके हैं और फिल्मफेयर ने 2020 में इसे ‘ऑल टाइम टॉप 10 रोमांटिक सॉन्ग्स’ में शामिल किया।
रेखा का मशहूर डायलॉग “तुम्हें चाहा है, तुम्हें पुकारा है…” अब भी लोगों की जुबान पर छाया है। मुकद्दर का सिकंदर में विनोद खन्ना, राखी और अमजद खान भी थे, मगर जादू सिर्फ एक था अमिताभ और रेखा का खामोश, मगर आग बरसाता इश्क।

