
पूर्णिया, 20 दिसंबर (राजेश कुमार झा) सरकारी राजस्व का बंदरबांट मामले में बिहार के दालकोला चेकपोस्ट सबसे अव्वल कहा जा रहा है.कहने का मतलब न खाता न बही,जो हिमांशु कहे वही सही.बताते चलें कि दालकोला चेकपोस्ट पर हर महीने तकरीबन 32 लाख 40 हजार के सरकारी राजस्व का बंदरबांट हो रहा है. कहने का मतलब जो कमाई सरकार के खजाने में जानी चाहिए़.वो सरकार के खजाने में नहीं जाकर जिले के बड़े अधिकारी से लेकर विभाग तक बंदरबांट में चली जाती है.

अब सवाल ये उठता है कि ये कौन सी राशि है.जिसका बंदरबांट हो रहा है और अधिकारी क्यों मौन है.बताते चलें कि ये राशि गलत तरीके से उगाही करने वाली राशि बताई जा रही है.मतलब इंट्री माफिया और दालकोला चेकपोस्ट पर तैनात परिवहन विभाग के बड़े बाबू हिमांशु कुमार की मिलीभगत से की जा रही है.बताते चलें कि दालकोला चेकपोस्ट पर प्रति दिन चार चार घंटे का 6 शिफ्ट में परिवहन विभाग के कर्मी अपनी ड्यूटी करते है.सभी शिफ्ट के कर्मी को 18 हजार रुपए अवैध उगाही का टारगेट रहता है.जिसे उगाही कर परिवहन विभाग के बड़े बाबू हिमांशु को देना है.यानि प्रतिदिन 18000 गुना 6 बराबर -108000 (एक लाख आठ हजार रुपया प्रतिदिन) यानि एक महीने में कुल 32 लाख 40 हजार का सरकारी राजस्व की अवैध तरीके से उगाही होती है.जिसका बंदरबांट हो रहा है.अब सवाल ये उठता है कि दालकोला चेकपोस्ट पर इतने बड़े पैमाने में भ्रष्टाचार हो रहा है और जिले के बड़े अधिकारियों क्यों मौन है.इन सरकारी राजस्व के बंदरबांट की जांच क्यों नहीं हो रही है.क्या ये खेल जिले के बड़े अधिकारी और विभाग की देखरेख में हो रहा है.

