पटना (अशोक “अश्क”) बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन सारण जिले के सोनपुर से आरजेडी विधायक रामानुज प्रसाद के खिलाफ था। दर्जनों की संख्या में आरजेडी कार्यकर्ता विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राबड़ी देवी के आवास पहुंचे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मांग की कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में रामानुज प्रसाद को दोबारा टिकट न दिया जाए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विधायक रामानुज प्रसाद ने अपने क्षेत्र सोनपुर में ठीक से काम नहीं किया। उनके मुताबिक, मानसून के समय सोनपुर विधानसभा क्षेत्र बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, लेकिन विधायक एक बार भी अपने क्षेत्र के लोगों से मिलने नहीं आए। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि न तो उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की, न ही उनका हालचाल जानने का प्रयास किया।
आरजेडी कार्यकर्ताओं ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को सोनपुर से रामानुज प्रसाद की जगह किसी अन्य नेता को प्रत्याशी बनाना चाहिए। यह विरोध प्रदर्शन भाई सुरेंद्र यादव के समर्थकों द्वारा किया गया था, जो सोनपुर क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।
चर्चाएं हैं कि इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में रामानुज प्रसाद का टिकट कट सकता है। सूत्रों के अनुसार, वह पहले से ही लालू परिवार की निगाहों में हैं, और उन पर कई शिकायतें पहले भी आई हैं। 2023 में जब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी, तब तत्कालीन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के सामने भी रामानुज ने अपनी भड़ास निकालते हुए आरोप लगाए थे। उस वक्त, सोनपुर मेला के उद्घाटन समारोह के दौरान विधायक ने सरकार पर क्षेत्र के गरीबों और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जब वह विधानसभा में सोनपुर के मुद्दे उठाते हैं, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव बस बैठकर सुनते रहते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।
विरोध प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने न केवल रामानुज के खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि सोनपुर विधानसभा क्षेत्र में एक नया चेहरा सामने लाया जाए। उनका कहना था कि रामानुज का प्रदर्शन उनके क्षेत्र के लोगों के लिए निराशाजनक रहा है, और पार्टी को युवा और सक्रिय नेता को टिकट देने की जरूरत है।
वहीं, इस मुद्दे पर आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या रामानुज प्रसाद का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहेगा या नहीं।
इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है, और अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आरजेडी इस विरोध को गंभीरता से लेते हुए कोई कदम उठाएगा, या फिर यह सिर्फ एक स्थानीय विरोध के रूप में खत्म हो जाएगा।

