भागलपुर (अशोक “अश्क”) आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भागलपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की जांच में यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान से आई दो महिलाओं के नाम पर मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिए गए हैं। यह मामला सामने आने के बाद न केवल स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है, बल्कि गृह मंत्रालय ने भी अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और निगरानी की प्रक्रिया तेज कर दी है।

मंत्रालय की जांच में भागलपुर जिले के इशाकचक थाना क्षेत्र के भीखनपुर गुमटी नंबर 3, टैंक लेन में रह रही दो पाकिस्तानी महिलाओं इमराना खानम उर्फ इमराना खातून (पिता इबतुल हसन) और फिरदौसिया खानम (पति मोहम्मद तफजील अहमद) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन दोनों के नाम पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कर दिए गए और उनके वैध वोटर आईडी कार्ड भी बन गए हैं।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय ने भागलपुर के एसएसपी को तत्काल जांच के निर्देश दिए। स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई और अब भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और एसएसपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
डीएम डॉ. चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दोनों महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में गहराई से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वोटर आईडी कैसे बने और इसमें किन अधिकारियों या एजेंसियों की लापरवाही रही।
स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के अनुसार, रंगपुर (अब बांग्लादेश में) निवासी फिरदौसिया खानम 19 जनवरी 1956 को तीन महीने के वीजा पर भारत आई थी, जबकि इमराना तीन साल के वीजा पर भारत आई थी। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी दोनों यहीं रह रही थीं और स्थानीय नागरिक की तरह जीवन बिता रही थीं।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद असलम, जो 24 मई 2002 को दो साल के वीजा पर भारत आया था, उसने भी न केवल भारत में ठिकाना बना लिया बल्कि अपना आधार कार्ड भी बनवा लिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन तीनों ने भारत में अवैध रूप से रहकर धीरे-धीरे नागरिकता प्राप्त करने की कोशिश की।
गृह मंत्रालय इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। मंत्रालय के निर्देश पर राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है ताकि अन्य ऐसे मामलों का भी खुलासा हो सके।
यह मामला न केवल देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

