नई दिल्ली, 3 सितम्बर (अशोक “अश्क”) जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो रही है, जिसमें वर्तमान 12% और 28% के स्लैब हटाकर केवल 5% और 18% के दो टैक्स स्लैब लागू करने पर मुहर लग सकती है। राज्यों के मंत्रियों के समूह ने इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है।

इस फैसले से कई सामान्य उपयोग की चीजें अब 12% की बजाय 5% जीएसटी स्लैब में आ जाएंगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। हालांकि, कारों और अल्ट्रा लग्जरी गुड्स पर टैक्स को लेकर अब भी मतभेद बने हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ राज्यों ने सुझाव दिया है कि 40 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 18% टैक्स लगाया जाए, जबकि केंद्र सरकार इन्हें 5% टैक्स के तहत रखना चाहती है। अब इस मुद्दे पर काउंसिल में चर्चा होगी।
लग्जरी वस्तुओं के लिए 40% का स्पेशल टैक्स रेट प्रस्तावित किया गया है, जिसमें सिगरेट, पान मसाला, और बड़ी कारें शामिल हैं। एंट्री लेवल कारों को 28% से घटाकर 18% स्लैब में लाया जा सकता है। इसके अलावा, टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज जैसी वस्तुओं को भी 18% स्लैब में शामिल करने की योजना है।
वहीं, 2500 रुपये से अधिक के रेडीमेड कपड़े और जूते को 12% से बढ़ाकर 18% टैक्स स्लैब में डाला जा सकता है।
SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी दरों में बदलाव से लगभग 85,000 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व घाटा हो सकता है। हालांकि, मंगलवार को आई दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि राज्यों को इससे लाभ होगा और इस वित्त वर्ष में उन्हें 14 लाख करोड़ रुपये से अधिक का SGST और अन्य राजस्व मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह सुधार सिस्टम को पारदर्शी बनाएगा और छोटे कारोबारियों व आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

