नई दिल्ली, 6 सितंबर (अशोक “अश्क”) शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के हालिया शिखर सम्मेलन के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अजरबैजान ने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारत ने उसके SCO में पूर्ण सदस्य बनने के आवेदन को ‘ बदले की भावना’ से रोक दिया। अजरबैजान का कहना है कि भारत यह कदम उसके पाकिस्तान के साथ करीबी संबंधों की वजह से उठा रहा है।

हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि SCO की सदस्यता प्रक्रिया संगठन के चार्टर और सर्वसम्मति पर आधारित होती है, न कि द्विपक्षीय रिश्तों या दुश्मनी पर। भारत ने यह भी बताया कि उसका करीबी मित्र देश आर्मेनिया भी पूर्ण सदस्य नहीं बन पाया है, जिससे साफ है कि कोई पक्षपात नहीं किया गया।
31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच चीन के तियानजिन शहर में SCO का 25वां शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत सभी प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया।
SCO के फिलहाल 10 पूर्ण सदस्य हैं भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस। अजरबैजान, डायलॉग पार्टनर के रूप में जुड़ा हुआ है और वह लंबे समय से पूर्ण सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है।
सम्मेलन के दौरान अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मुलाकात की और भारत पर ‘शत्रुता’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान से अजरबैजान की नजदीकी की वजह से उसे वैश्विक मंचों पर रोकने की कोशिश करता है। अलीयेव ने यह भी दावा किया कि चीन, रूस और पाकिस्तान ने अजरबैजान की सदस्यता का समर्थन किया, लेकिन भारत ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को ब्लॉक कर दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को सफाई देते हुए कहा, “इस वर्ष, अजरबैजान और आर्मेनिया दोनों ने SCO में पूर्ण सदस्यता के लिए आवेदन दिए थे, लेकिन समय की कमी के कारण तियानजिन सम्मेलन में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। यह मामला अब भी विचाराधीन है।”
भारत आर्मेनिया का निकटतम रक्षा साझेदार रहा है। भारत ने उसे पिनाका रॉकेट सिस्टम, आकाश मिसाइल, स्वाथी रडार, और तोपें दी हैं। दूसरी ओर, अजरबैजान और पाकिस्तान के रिश्ते गहरे हैं। अजरबैजान ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया है और हालिया “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी भारत का विरोध किया था।
राष्ट्रपति अलीयेव ने स्पष्ट किया कि अजरबैजान, पाकिस्तान के साथ अपने ‘भाईचारे वाले संबंध’ को आगे भी मजबूत करता रहेगा, चाहे भारत कितना भी विरोध करे।
SCO सदस्यता विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक मंचों पर शक्ति संतुलन कैसे काम करता है। आने वाले महीनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।

