नई दिल्ली, 25 सितम्बर (अशोक “अशोक”) यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया से रूस के खिलाफ तत्काल और सख्त कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध को यूरोप में फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए, तो पूरा यूरोप रूसी हमलों की चपेट में आ सकता है।

बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि रूस अब सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “रूसी ड्रोन अब पूरे यूरोप में उड़ रहे हैं। पुतिन का मकसद केवल यूक्रेन पर कब्जा करना नहीं है, बल्कि इस युद्ध को आगे बढ़ाकर यूरोप में स्थायी अस्थिरता पैदा करना है।”
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध और रणनीतिक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “अगर हम अभी एक साथ नहीं आए, तो रूस की आक्रामकता अन्य देशों तक भी पहुंचेगी। यह केवल यूक्रेन की लड़ाई नहीं है, यह वैश्विक सुरक्षा का मामला है।”
राष्ट्रपति जेलेंस्की की यह टिप्पणी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी सभी जमीन रूस से वापस जीत सकता है। ट्रंप के इस बयान को उनकी नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे पहले वे रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं।
अपने भाषण में जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक संगठन यूक्रेन को सुरक्षा देने में असफल रहे हैं। “नाटो में शामिल होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है,” उन्होंने कहा, “अब सवाल यह नहीं है कि कौन परमाणु हथियारों से लैस ड्रोन पहले बनाएगा, बल्कि यह है कि रूस को अभी कैसे रोका जाए।”
फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में हाल ही में कई नए मोड़ आए हैं। पिछले सप्ताह एस्टोनिया, पोलैंड और रोमानिया जैसे नाटो सदस्य देशों ने दावा किया है कि उनके हवाई क्षेत्रों में रूसी ड्रोन देखे गए हैं। इससे यूरोप में सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।
इस बीच ट्रंप ने भी संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने बयान में कहा कि यदि रूसी ड्रोन या लड़ाकू विमान नाटो देशों के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें मार गिराना चाहिए।
जेलेंस्की के इस चेतावनी भरे भाषण के बाद अब दुनिया की निगाहें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

