नई दिल्ली, 8 अक्तूबर (अशोक “अश्क्क) सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने भारत में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNHCR द्वारा ‘शरणार्थी कार्ड’ जारी करने की प्रक्रिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “उन्होंने यहां शोरूम खोल रखा है और प्रमाणपत्र बांट रहे हैं।” यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई जिसमें सूडान का एक नागरिक भारत में अस्थायी संरक्षण की मांग कर रहा था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी पत्नी और बच्चे को UNHCR ने शरणार्थी कार्ड जारी किए हैं और वह ऑस्ट्रेलिया में शरण पाने की प्रक्रिया में है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने तर्क दिया कि ऐसे कार्ड गृह मंत्रालय और विदेशी नागरिक पंजीकरण कार्यालय (FRO) द्वारा गंभीरता से लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह कार्ड किसी को यूं ही नहीं मिलता, बल्कि कई वर्षों की जांच प्रक्रिया के बाद जारी किया जाता है।
हालांकि, अदालत ने इस पर सहमति नहीं जताई। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि भारत ने अब तक रिफ्यूजी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, और शरणार्थियों के लिए कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
मुरलीधर ने बताया कि अफ्रीकी मूल के लोगों को बिना कारण हिरासत में लिया जा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि “हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी, लाखों लोग यहां बैठे हैं।”
अंततः अदालत ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से राहत मांगने की छूट दी।

