
पटना, 21 जनवरी (पटना डेस्क) बिहार में जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और समझने में हो रही भारी परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब कैथी लिपि में लिखे खतियान, लगान रसीद और बंदोबस्ती जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिकोड करने के लिए विशेषज्ञों की भर्ती की जाएगी। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की है कि विभाग जल्द ही कैथी लिपि विशेषज्ञों का एक विशेष पैनल तैयार करेगा, जिससे आम रैयतों को दाखिल-खारिज और भूमि सर्वेक्षण के नाम पर भटकना नहीं पड़ेगा।

राज्य के राजस्व अभिलेखागारों में सुरक्षित अधिकांश पुराने कागजात कैथी लिपि में दर्ज हैं, लेकिन वर्तमान समय में इस लिपि के जानकार बेहद कम रह गए हैं। नतीजतन दाखिल-खारिज और सर्वे से जुड़े मामलों में दस्तावेजों का मिलान नहीं हो पाता और फाइलें महीनों तक लटकी रहती हैं। मौजूदा सर्वे कार्य में रैयतों को अपने ही पुरखों की जमीन साबित करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लिपि की जानकारी न होने का फायदा उठाकर बिचौलिये और कुछ भ्रष्ट कर्मी लोगों को गुमराह करते रहे हैं।उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि चयनित विशेषज्ञों को विभागीय स्तर पर विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सरकार की मंशा है कि आम लोगों को इन सेवाओं का लाभ बेहद कम और किफायती दरों पर मिले, ताकि आर्थिक बोझ न बढ़े। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल भूमि सर्वेक्षण समय पर पूरा होगा, बल्कि राजस्व कार्यों में पारदर्शिता आएगी। सरकार जमीन विवादों को जड़ से खत्म करने और रैयतों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

