नई दिल्ली, 12 सितम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिका के एक वरिष्ठ सीनेटर बिल हेगर्टी ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि चीन ने भारत के खिलाफ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिससे भारतीय सैनिक “सचमुच पिघलने लगे थे”। यह बयान उन्होंने 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में दिया। हेगर्टी अमेरिकी संसद में भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे, जहां उन्होंने चीन की सैन्य रणनीति और भारत पर उसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई।

टेनेसी से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर हेगर्टी ने कहा, “चीन ने उस संघर्ष में गोलियों का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियार का उपयोग किया, जिससे भारतीय सैनिक सचमुच पिघल गए।”
उनका यह बयान उस समय आया है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में बीजिंग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। वहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक तस्वीर सामने आई थी, जिसने वाशिंगटन के कुछ राजनीतिक हलकों में चिंता और असहजता को जन्म दिया।
सीनेटर हेगर्टी ने इस मुलाकात की तस्वीरों पर अमेरिका में हो रही चिंताओं की आलोचना करते हुए कहा कि केवल एक तस्वीर से दोनों देशों के बीच वास्तविक संबंधों को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने कहा, “भारत और चीन के बीच गहरे अविश्वास और लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह केवल एक फोटो ऑप (photo-op) नहीं है, अंतरराष्ट्रीय संबंध इससे कहीं अधिक जटिल होते हैं।”
हेगर्टी के इस बयान से पहले भी 2020 में चीनी सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि गलवान घाटी में विवादित ऊंचाई वाले क्षेत्रों से भारतीय सैनिकों को हटाने के लिए “माइक्रोवेव हथियारों” का प्रयोग किया गया था। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि इस हथियार के कारण भारतीय सैनिकों को अत्यधिक असहजता हुई और उन्हें पीछे हटना पड़ा।
हालांकि, उस समय भारत सरकार और सेना की ओर से इस दावे का कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। चीन ने भी इस हथियार के प्रयोग की बात को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया।
सीनेटर हेगर्टी के दावे जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक “पिघल गए” – की किसी भी सार्वजनिक सैन्य रिकॉर्ड या स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि नहीं हुई है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
वर्तमान में भारत, अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहा है, जिसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग अहम है। वहीं, भारत और चीन के बीच संबंध अब भी जटिल बने हुए हैं। सीमा पर तनाव, व्यापार और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद, भारत बीजिंग के साथ डिप्लोमैटिक बैलेंस बनाए रखने की नीति पर चल रहा है।
सीनेटर हेगर्टी का यह बयान निश्चित ही चौंकाने वाला है और भारत-चीन सीमा विवाद पर एक नया विवाद खड़ा कर सकता है। हालांकि, जब तक इस तरह के आरोपों की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से नहीं होती, तब तक इन्हें एक राजनीतिक बयान या रणनीतिक दबाव की रणनीति के तौर पर ही देखा जा सकता है।
इस बीच, भारत को अपनी विदेश नीति में बेहद सतर्क और संतुलित रुख बनाए रखने की जरूरत है, ताकि वह चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों को संभालते हुए अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों के साथ रणनीतिक गठबंधन को मजबूत करता रहे।

