
पटना, 15 फरवरी (अविनाश कुमार) बिहार के लाखों ज़मीन मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बिहार रेवेन्यू और लैंड रिफॉर्म डिपार्टमेंट इस साल जून से अपनी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए रैयतों को पुराने लैंड डीड, रजिस्ट्री पेपर और संबंधित दस्तावेज सीधे डाउनलोड करने की सुविधा देने जा रहा है। वर्षों से सर्किल ऑफिस का चक्कर काट रहे लोगों को अब खाता नंबर, प्लॉट नंबर और जिला भरते ही 2006 से पहले के रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल सकेंगे। 1990 से 2005 के बीच के चार करोड़ से ज्यादा पन्ने स्कैन किए जा चुके हैं।

यह पहल राज्य के भूमि प्रशासन में बड़े बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, जिन्हें हाल ही में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी मिली है, खुद प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि “ज्यादातर जमीन विवादों की जड़ नकली दस्तावेज हैं” और डिजिटाइजेशन ही स्थायी समाधान है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि राज्य में करीब 60% अपराध जमीन विवादों से जुड़े हैं।नए सिस्टम में ऑनलाइन फीस भुगतान और मिनटों में डिजिटल डिलीवरी की सुविधा भी होगी।

दाखिल-खारिज मामलों के लिए सख्त समयसीमा तय की गई है—बिना विवाद वाले मामलों का निपटारा 7 दिन में, विवादित मामलों का 11 दिन में और जटिल मामलों का अधिकतम 75 दिन में। विभाग का दावा है कि ऑनलाइन निपटान दर 25% से बढ़कर 75% हो गई है और मार्च 2026 तक 46 लाख लंबित आवेदन साफ किए जा चुके हैं। 2027 तक चल रहे भू-सर्वे को पूरा करने का लक्ष्य है।

