समस्तीपुर, 1 सितंबर (राजेश झा) समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर में प्राचार्य डॉ. मीना प्रसाद के सेवानिवृत्ति पर आयोजित विदाई समारोह उस वक्त विवादों में घिर गया जब कार्यक्रम में जातीय टिप्पणियों और पदस्थापन से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर आक्रोश भड़क उठा। आरोप है कि समारोह जातिवाद और शिक्षा माफिया की साजिश की भेंट चढ़ गया।

जानकारी के अनुसार, चर्चित शिक्षा माफिया माने जाने वाले निर्मल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि मिथिला विश्वविद्यालय में यादव समाज को छोड़कर अन्य जातियों जैसे कोइरी, कुर्मी, भूमिहार, राजपूत और बनिया समाज के ही लोगों को प्राचार्य बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा चहेतों को फोन कर बुलाया जा रहा है और डॉ. मीना प्रसाद को पदस्थापन समिति में रखकर नियुक्तियों में पक्षपात किया जा रहा है।

निर्मल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. मीना प्रसाद ने सेवानिवृत्त बाहरी लोगों को ही स्नातकोत्तर की परीक्षाओं में एक्सटर्नल नियुक्त किया, जो नियमों के विरुद्ध है। साथ ही यह भी कहा गया कि वे खुद निलंबन और वेतन वृद्धि रोक की सजा झेल चुकी हैं, फिर भी कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी की मेहरबानी से उन्हें यू.आर. कॉलेज, रोसड़ा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
डॉ. प्रसाद पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में लाखों रुपये का चेक जारी कर दो डाटा ऑपरेटरों का तीन माह का लंबित वेतन भुगतान किया, जिसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण ने कॉलेज परिसर में माहौल को गरमा दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर डॉ. मीना प्रसाद के खिलाफ आपराधिक और मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा है। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि राजभवन द्वारा कुलपति की कार्यशैली की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

