समस्तीपुर, 5 सितम्बर (राजेश कुमार झा) भारत की कर व्यवस्था में वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू हुए सात वर्ष से अधिक समय हो चुका है। इसे “वन नेशन,शन, वन टैक्स” की संकल्पना के साथ लाया गया था ताकि जटिल कर ढांचे को सरल बनाया जा सके। समय-समय पर जीएसटी परिषद ने उपभोक्ता और उद्योग दोनों के हितों को देखते हुए दरों में संशोधन किया है। जीएसटी 2.0 अंतर्गत परिषद ने जिन वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दरों में कटौती की है, उसका सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुँचेगा। जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा लाभ महंगाई पर नियंत्रण होगा और साथ ही अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने का काम करेगा।

जीएसटी दरों में कमी का सबसे पहला और सीधा असर आम उपभोक्ताओं, मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार की जेब पर सबसे अधिक होगा, क्योंकि इन्हें ही महंगाई की मार सबसे ज्यादा सहनी पड़ती है। जिन वस्तुओं और सेवाओं पर पहले अधिक कर देना पड़ता था, अब वही उत्पाद सस्ती कीमत पर उपलब्ध होंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी आवश्यक घरेलू सामान की कीमत 5 प्रतिशत घटती है तो सालाना स्तर पर परिवार हज़ारों रुपये की बचत कर सकता है। युवा और छात्रों के लिए मोबाइल, लैपटॉप या डिजिटल सेवाओं पर जीएसटी कटौती से शिक्षा और रोजगार के अवसर आसान होंगे। महिलाओं के लिए किचन व घरेलू उपभोग की वस्तुओं जैसे डिटर्जेंट, किचन अप्लायंसेज़, मोबाइल एक्सेसरीज़ या पैक्ड फूड पर कर घटने से परिवार का मासिक बजट संतुलित होगा, उपभोक्ता के पास बचत बढ़ेगी और अतिरिक्त क्रय शक्ति से वे अन्य वस्तुएँ व सेवाएँ भी खरीद सकेंगे। इससे बाज़ार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में गति आएगी। यानी घरेलू अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर होगा। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए भी यह सकारात्मक खबर है, क्योंकि सस्ते दाम पर उत्पाद मिलने से उनकी बिक्री बढ़ेगी।
जीएसटी दरों में कमी केवल उपभोक्ता को ही नहीं, बल्कि उद्योग जगत को भी लाभ देती है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि उत्पादों की मांग बढ़ने से उत्पादन बढ़ाना होगा। उत्पादन बढ़ने पर नई नौकरियाँ पैदा होंगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। छोटे और मझोले उद्योग को सबसे बड़ा फायदा होगा क्योंकि इनकी लागत कम होगी और प्रतिस्पर्धा में वे टिक पाएँगे।
किसान परिवारों के लिए आवश्यक वस्तुएँ सस्ती होने से जीवनयापन आसान होगा। ग्रामीण उपभोक्ता की क्रय क्षमता बढ़ेगी। डिजिटल उपकरण और मोबाइल एक्सेसरीज़ सस्ती होने से डिजिटल इंडिया मिशन को बल मिलेगा और ग्रामीण कनेक्टिविटी सुधरेगी।
कर दरों में कटौती सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। अगर बहुत अधिक वस्तुओं पर टैक्स घटा दिया जाए तो सरकारी राजस्व में कमी से विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है। कर दरों में बार-बार बदलाव से कर प्रणाली की स्थिरता पर प्रश्न उठ सकता है। उद्योग जगत के लिए दीर्घकालिक नीति की स्थिरता अधिक लाभकारी होती है। उपभोक्ता तक लाभ पहुँचाने के लिए यह जरूरी है कि व्यापारी और कंपनियाँ घटे हुए टैक्स का फायदा कीमतों में कमी करके वास्तव में उपभोक्ता को दें।
यद्यपि कर दरों में कटौती का अर्थ है कि सरकार को अल्पकाल में कर संग्रह यानी राजस्व में कमी झेलनी पड़ सकती है, लेकिन दीर्घकाल में इसका सकारात्मक असर होता है। मांग बढ़ने से कुल मिलाकर बिक्री में वृद्धि होगी और इससे कर संग्रह का नुकसान कम हो जाएगा। यह एक ऐसा निर्णय है जो अल्पकाल में उपभोक्ता की जेब को हल्का और दीर्घकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाएगा। कुल मिलाकर, यह कदम “आम आदमी के लिए राहत और अर्थव्यवस्था के लिए प्रगति” का दोहरा संदेश लेकर आया है।

