नई दिल्ली, 5अक्तूबर (अशोक “अश्क”) उत्तराखंड में पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट के निर्णय के अनुसार अब शिक्षकों की पदोन्नति के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य कर दी गई है, जिसके चलते राज्य के बेसिक और जूनियर हाईस्कूलों के 18 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।

शिक्षा निदेशालय के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक का समय बचा है, उन्हें आगामी दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। कोर्ट का यह आदेश पुराने और नए, दोनों प्रकार के शिक्षकों पर लागू किया गया है। इस आदेश के चलते पदोन्नति प्रक्रिया भी टीईटी पास करना आवश्यक बना दी गई है।
हालांकि, राज्य सरकार ने इस आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है और इसकी प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने बताया कि चमोली, टिहरी गढ़वाल और चंपावत जिलों से शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर दिशा-निर्देश मांगे गए थे। इन जिलों में शिक्षक संगठनों द्वारा धरना और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।
इस पर शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार की स्थिति से अवगत कराएं। शिक्षकों का यह भी कहना है कि 2010-11 से पहले नियुक्त शिक्षकोंbपर यह नियम लागू नहीं होना चाहिए, क्योंकि उस समय टीईटी की व्यवस्था ही नहीं थी और उनकी नियुक्तियां वैध प्रक्रिया से हुई थीं।
शिक्षकों का मांग है कि सुप्रीम कोर्ट से अंतिम निर्णय आने तक पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं रोकी जानी चाहिए, ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों के अधिकारों का हनन न हो।

