
पूर्णिया:-09 जुलाई(राजेश कुमार झा)जिले के तत्कालीन एसपी रहे कार्तिकेय शर्मा ने अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिसिंग के लिए काफी जद्दोजहद कर शहर में 12 टीओपी बनाया गया.जिसका फायदा भी लोगों को दिखने लगा.पिछले 2 सालों में नशे के खिलाफ धड़पकड़ में थाने से अच्छा प्रदर्शन टीओपी का रहा.जिससे नशे के कारोबारी में एक भय पैदा हो गया था. शहर की स्थिति ये थी कि शहर के हर गली-मोहल्ले में टीओपी की पेट्रोलिंग करती हुई गाड़ी दिख जाती थी. जिससे अपराधियों और नशे के कारोबारी में हमेशा भय बना हुआ रहता था.लेकिन विगत कुछ महीनों में टीओपी और थाने के बीच तालमेल की कमी होने लगी.जिससे दोनों के बीच समन्वय बहुत अच्छा नहीं रहा.जिले के पुलिस अधिकारियों को कई तरह की शिकायतें मिलने लगी. जिसका कोई भी नतीजा नहीं निकला.जिससे दोनों के बीच बेहतर तालमेल की बहुत कमी हो गई.जिसका फायदा अपराधी और नशे के कारोबारी को मिलने लगा. शहर में कई तरह के क्राइम बढ़ गए.इन्हीं मुद्दों को लेकर जब शहर के लोगों के पास उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो लोगों ने बताया कि किसी नए कामों को करने में काफी मुश्किलें आती है.लेकिन उसको हटाने में कोई मुश्किलें नहीं आती है. बेहतर होता कि जो बन गया है या जो पिछले दो वर्षों से चल रहा है तो उससे और बेहतर कैसे काम लिया जाय, इस पर ध्यान देना बेहतर होता.टीओपी को चेकपोस्ट बनाने से बेहतर होता कि उससे और बेहतर तरीके से काम लिया जाय.थानों में ऐसे भी बहुत तरह के कामों का प्रेशर रहता है.कम से कम उनका प्रेशर तो थोड़ा कम हुआ था.जिससे थाने में और बेहतर काम हो रहा था.

