
पटना, 16 जनवरी (पटना डेस्क) मकर संक्रांति के बाद बिहार की सियासत में दही-चूड़ा की मिठास के साथ सियासी गर्मी भी तेज हो गई है। पटना में जेडीयू विधायक और पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद के आवास पर हुए दही-चूड़ा भोज ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महज पांच मिनट की मौजूदगी को साधारण शिष्टाचार नहीं, बल्कि बड़े सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संक्रांति के मौके पर कई नेताओं के यहां पहुंचे, लेकिन चेतन आनंद के घर रुकना और आशीर्वाद देकर जाना खास माना जा रहा है। इसके तुरंत बाद यह चर्चा तेज हो गई कि अगले कैबिनेट विस्तार में चेतन आनंद को मंत्री पद मिल सकता है। हालांकि, सवाल पर चेतन आनंद ने संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं है, लेकिन समय और परिस्थिति के अनुसार जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाने के लिए वे तैयार हैं।इन अटकलों को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि आनंद मोहन की रिहाई में नीतीश कुमार की भूमिका अहम रही और 2024 के फ्लोर टेस्ट के दौरान चेतन आनंद ने आरजेडी छोड़कर नीतीश सरकार का साथ दिया था। दही-चूड़ा भोज में कांग्रेस विधायकों की गैरहाजिरी पर चेतन आनंद ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें ढंग से बुलाया जाए तो वे सभी जेडीयू में आ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि छह कांग्रेस विधायक संपर्क में हैं।उधर, तेज प्रताप यादव के भोज में एनडीए मंत्रियों की मौजूदगी पर भी सियासी चर्चाएं रहीं। आनंद मोहन ने खुले मंच से नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार बदल चुका है और एनडीए अगले पांच साल में रोजगार का नया अध्याय लिखेगा। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए एनडीए को एकजुट ताकत बताया।

