पूर्णिया, 15 दिसंबर (राजेश कुमार झा) पूरे बिहार में राजस्व के नाम पर वसूली के मामले में फिसड्डी है दालकोला चेकपोस्ट.एक वक्त था जब राजस्व वसूली में दालकोला चेकपोस्ट पूरे बिहार में अव्वल हुआ करता था.लेकिन विगत दो सालों से राजस्व वसूली में दालकोला चेकपोस्ट फिसड्डी साबित हो रहा है.ऐसा नहीं है कि राजस्व की वसूली नहीं हो रही है.या गाड़ियों की आवाजाही नहीं हो रही है.सब कुछ पहले की तरह ही ठीक ठाक चल रहा है.

फिर भी दालकोला चेकपोस्ट वसूली में फिसड्डी क्यों है.बिफोरप्रिंट डिजिटल की टीम ने जब दालकोला चेकपोस्ट का पूरे सात दिनों का पूरा ब्यौरा लिया तो आंखे खुली रह गई कि इतने बड़े पैमाने पर सरकार के राजस्व का बंदरबाट चल रहा है और किसी को कानों कान तक खबर नहीं.दालकोला चेकपोस्ट पर तैनात परिवहन विभाग के एक पूर्व कर्मी बताते है कि सर कुछ नहीं होने वाला है.जिले के बड़े अधिकारी से लेकर विभाग तक सब कुछ है मैनेज.सबसे बड़ी बात इतने बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व का बंदरबाट हो रहा है और किसी की कानों कान खबर नहीं.बताते चलें कि जब बिफोरप्रिंट डिजिटल की टीम जब रात के 9 बजे से रात के 1 बजे तक मामले को देखा तो अमूमन 46 ओवरलोडिंग ट्रकों की आवाजाही हुई.लेकिन परिवहन विभाग ने एक भी ओवरलोडिंग गाड़ियों का चलान नहीं काटा.पूछने पर परिवहन विभाग के कर्मी ने बताया कि सब अंडर लोड गाड़ियां थी.उन्होंने बताया कि सर हमलोग कुछ भी नहीं कर सकते है.ऊपर से ही आदेश है. अब सवाल ये होता है कि इन लोगों को ऊपर से आदेश कौन देता है.कौन है जो ऊपर से इन लोगों को हैंडल कर रहा है.या ये लोग ऊपर वाले का नाम लेकर सारा खेल कर रहा है. अगर आज भी दालकोला चेकपोस्ट पर तरीके से जांच की जाए तो परिवहन विभाग के हिमांशु कुमार और इंट्री माफियाओं का पूरा खेल सबके सामने आएगा और सरकारी राजस्व का बंदरबाट भी बंद हो जाएगा.

