
पूर्णिया:-24 जून(राजेश कुमार झा)नगर निगम क्षेत्र में चल रहे दर्जनों कोचिंग संस्थान सुरक्षा मानकों में फिसड्डी है.नगर निगम क्षेत्र का एक भी कोचिंग संस्थान ऐसा नहीं है,जो सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे.बिफोरप्रिंट डिजिटल नगर निगम क्षेत्र में चल रहे छोटे-बड़े कोचिंग संस्थानों में जाकर सुरक्षा मानकों की जानकारी ली तो एक भी ऐसा कोचिंग संस्थान नहीं मिला,जो सुरक्षा मानकों पर खरे उतरे.बताते चलें कि नगर निगम क्षेत्र में चल रहे 90 प्रतिशत कोचिंग संस्थान पूरी तरह वातानुकूलित है.कई बड़े कोचिंग संस्थान तो पूरी तरह सेंट्रली एयरकंडीशन है. जिस वजह से इन सभी वातानुकित कोचिंग सेंटर को तो और भी अधिक सुरक्षा मानकों पर ध्यान में रखना होगा.दूसरी तरफ सुरक्षा मानकों की बात करें तो फायर सेफ्टी डिवाइस तो तकरीबन 60 से 70 प्रतिशत कोचिंग संस्थानों में देखने के लिए जरूर मिल जाएंगे.लेकिन भगदड़ से बचने के लिए कोई उपाय नहीं है.बताते चलें कि शहर में एक से एक बढ़कर एवं बड़े-बड़े ब्रांड वाले कोचिंग संस्थान देखने को मिल जायेंगे.जिन्होंने अपने कोचिंग सेंटर के लिए छात्रों को पढ़ाने के लिए अच्छी व्यवस्था कर रखी है.जहां छात्रों की संख्या भी सैकड़ों में रहती है.लेकिन ठीक कोचिंग के गेट में जब घुसेंगे तो गेट के बाहर आपको बिजली विभाग की कमियां भी दिख जाएंगी.कोचिंग के गेट के बाहर उलझी-उलझी सैकड़ों की संख्या में बिजली की तारें दिख जाएंगी.जो किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण देते हुए जरूर दिख जायेंगे.बिजली विभाग को भी इन सब चीजों पर ध्यान देने की बहुत आवश्यकता है. दूसरी तरफ जिले के शिक्षा विभाग की भी ये जिम्मेदारी बनती है कि सभी कोचिंग संस्थान पर जाकर निबंधन की जांच करे और उन्हें निबंधन करवाने के लिए प्रोत्साहित करें.जिला प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि नगर निगम क्षेत्र में चल रहे सभी छोटे-बड़े कोचिंग संस्थानों के साथ बैठक करें,और उनकी जो समस्या हो तो उन्हें अविलंब दूर करने की कोशिश करे.क्योंकि हमारे और आपके ही बच्चे पढ़ते है इन कोचिंग संस्थानों में.अंत में कोचिंग संस्थानों को भी चाहिए़ की महंगी-महंगी फीस तो आप जरूर लेते है,लेकिन उन बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिये.

