चंडीगढ़, 10 सितम्बर (अशोक “अश्क”) पंजाब सरकार ने केंद्र द्वारा बाढ़ राहत के लिए घोषित 1,600 करोड़ रुपये के पैकेज को अपर्याप्त और राज्य का अपमान करार दिया है। सरकार का कहना है कि यह राशि राज्य को हुए असली नुकसान के मुकाबले बेहद कम है और इससे बाढ़ पीड़ितों को पर्याप्त मदद नहीं मिल पाएगी।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित पंजाब का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायज़ा लिया और बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की। इसके बाद केंद्र सरकार ने 1,600 करोड़ रुपये की राहत राशि की घोषणा की।
पंजाब के राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंदियां ने मीडिया से बातचीत में कहा, “जब मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान, टूटी सड़कों, बर्बाद हुई फसलों और बर्बाद हुए घरों के बारे में जानकारी दी, तब भी सिर्फ 1,600 करोड़ की मदद दी गई। मैं कहता हूं कि यह बहुत कम है। हमें करीब 60 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। इतनी छोटी रकम देना पंजाब के अपमान जैसा है।”
गौरतलब है कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ रुपये की राहत राशि की मांग की थी, लेकिन उसे उसके मुकाबले बहुत कम सहायता मिली।
राज्य इस समय 1988 के बाद की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। पिछले 24 घंटों में एक और व्यक्ति की मौत के साथ मरने वालों की संख्या 52 हो गई है। पठानकोट जिले में तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
राजस्व मंत्री के अनुसार, अब तक 22 जिलों के 2,097 गांव बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। लगभग 1.91 लाख हेक्टेयर भूमि पर फैली फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
पीएम मोदी ने अपनी घोषणा में यह भी बताया कि राज्य सरकार के पास पहले से 12,000 करोड़ रुपये की राशि खजाने में उपलब्ध है, जो राहत कार्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवारों के लिए सहायता राशि की भी घोषणा की: बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपये
गंभीर रूप से घायल लोगों को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद
जहां एक ओर केंद्र सरकार अपने स्तर पर राहत पैकेज देकर सहयोग की बात कह रही है, वहीं पंजाब सरकार इसे राज्य की ज़रूरतों से बहुत कम मान रही है। इस मुद्दे ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। अब सभी की नजर इस पर है कि क्या केंद्र सरकार राहत पैकेज में कोई और बढ़ोतरी करेगी या नहीं।

