
पटना, 06 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों और राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर चुके नीतीश कुमार अभी तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। स्पष्ट किया गया है कि वे कम से कम अगले एक महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उसके बाद ही सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक अप्रैल के दूसरे सप्ताह, लगभग 10 अप्रैल से राज्यसभा का नया कार्यकाल शुरू होगा। मौजूदा सदस्यों के रिटायर होने के बाद नए सदस्यों की औपचारिक एंट्री होगी। इसी समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है कि तब तक राज्य की कमान नीतीश कुमार के हाथों में ही रहेगी।सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर नए मुख्यमंत्री के चयन और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

अचानक इस्तीफे की स्थिति में राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है।दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि इस एक महीने के भीतर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस मसले पर लगातार मंथन कर रहा है। हालिया चुनावों में एनडीए को मिले भारी बहुमत के बाद यह भी माना जा रहा है कि पहली बार बिहार की कमान पूरी तरह बीजेपी के किसी नेता को सौंपी जा सकती है।इधर पटना के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरान जेडीयू संगठन में भी बड़े बदलाव संभव हैं। पार्टी के भीतर हलचल तेज है और चर्चाएं इस बात को लेकर भी हैं कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को संगठन या सरकार में अहम भूमिका दी जा सकती है।इस बीच नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा कि उनका सपना था कि वे संसद और बिहार विधानमंडल के चारों सदनों के सदस्य बनें। राज्यसभा जाने के साथ ही उनका यह राजनीतिक सफर पूरा हो जाएगा। उन्होंने बिहार की जनता के विश्वास के लिए आभार भी जताया।

