
पटना, 06 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही सियासी पारा चढ़ गया है। नामांकन के अंतिम दिन कुल छह उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस बार राज्यसभा चुनाव बिना मतदान के तय नहीं होगा। अब सभी की निगाहें 16 मार्च को होने वाले मतदान पर टिक गई हैं, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

सत्तारूढ़ एनडीए ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। एनडीए की ओर से भाजपा और जदयू ने दो-दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने एक प्रत्याशी खड़ा किया है। इस तरह एनडीए ने पांचों सीटों पर दावेदारी पेश कर दी है। दूसरी तरफ महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने एडी सिंह को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय रंग दे दिया है।विधानसभा की मौजूदा संख्या को देखते हुए राजनीतिक समीकरण बेहद दिलचस्प हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक एनडीए की चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

यही वह सीट है, जिसने चुनाव को रोमांचक बना दिया है।दूसरी ओर राजद के उम्मीदवार एडी सिंह की राह भी आसान नहीं है। उन्हें जीत दर्ज करने के लिए छह अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में दोनों खेमों की नजर कुछ छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों पर टिक गई है।सबसे ज्यादा चर्चा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच विधायकों को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि ये पांच विधायक चुनाव के नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा बसपा के एक विधायक का समर्थन भी महागठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि AIMIM और बसपा के विधायक इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में 16 मार्च का मतदान बिहार की सियासत में नया मोड़ ला सकता है।

