
पटना, 06 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ी हलचल मची हुई है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही सक्रिय राज्य राजनीति से दूरी बनाकर दिल्ली की सियासत की ओर रुख कर सकते हैं। राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किए जाने के बाद यह अटकलें और तेज हो गई हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां नारा दिया गया था—“2025 से 2030, फिर से नीतीश कुमार”, वहीं अब 2030 से पहले ही उनके राज्यसभा जाने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ने लगी हैं।

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की तैयारी पिछले करीब पंद्रह दिनों से चल रही थी। शुरुआत में चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत को राज्यसभा भेजने के विकल्प से हुई थी। लेकिन बातचीत आगे बढ़ने के साथ यह विचार सामने आया कि यह समय नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से सम्मानजनक तरीके से हटाने के लिए उपयुक्त हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने सहयोगियों के साथ चर्चा में संकेत दिया कि नीतीश कुमार की सेहत चिंता का विषय है और राज्यसभा की सीट उनके लिए सम्मानजनक विदाई का रास्ता बन सकती है।

बताया जाता है कि अमित शाह ने इस मुद्दे पर जदयू के तीन वरिष्ठ नेताओं—केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ‘ललन’ सिंह, राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा और मंत्री विजय कुमार चौधरी—से कई दौर की बातचीत की। इसके बाद निशांत की अमित शाह से मुलाकात भी कराई गई और राज्यसभा की संभावित उम्मीदवारी पर मंथन हुआ।सूत्रों के मुताबिक, फरवरी के आखिरी सप्ताह से जदयू नेताओं ने नीतीश कुमार के साथ लगातार बैठकें कीं। इसी बीच जदयू महासचिव मनीष वर्मा की संभावित उम्मीदवारी को रोकते हुए निशांत के नाम को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई गई।हालांकि 3 मार्च को परिवार को इस योजना की भनक लगी और वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने से रोकने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। बताया जाता है कि नीतीश कुमार नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कर चुके थे और बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की पटकथा लगभग लिखी जा चुकी थी।

