नई दिल्ली, 28 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) उत्तर प्रदेश सरकार ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए एक अभिनव योजना की शुरुआत की है। अब पशुपालन विभाग किसानों से पराली लेकर बदले में गोबर की खाद देगा। इस योजना का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है।

सरकार की योजना के अनुसार, किसान अपने खेतों से पराली इकट्ठा कर गो आश्रय स्थलों (गोशालाओं) में जमा करेंगे। वहां पराली का उपयोग पशुओं के बिछावन और आहार के रूप में किया जाएगा। बदले में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली गोबर खाद दी जाएगी, जो खेतों की उर्वरता बढ़ाने और पैदावार में सुधार करने में मदद करेगी।
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों और इस योजना के फायदों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि किसानों पर जुर्माना लगाने से बेहतर है कि उन्हें लाभकारी विकल्प दिए जाएं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन जिलों में भूसा टेंडर लंबित हैं, वहां के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि गोशालाओं में “गो काष्ठ-मोक्ष दंडिका” के उत्पादन के लिए मशीनें सीएसआर फंड से लगाई जाएंगी। इससे पराली और गोबर का उपयोग पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण में किया जा सकेगा।
इसके अलावा, दुग्ध समितियों को सक्रिय करने और किसानों को दूध का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग जल्द ही किसानों के लिए प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि वे आधुनिक पशुपालन तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
यह पहल न केवल प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी माध्यम बनेगी।

