पटना (अशोक “अश्क”) बेतिया के एक ऑडिटोरियम में मंगलवार को जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जन सुराज जो काम बिहार में कर रहा है, वह सिर्फ बिहार की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन लाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश के 50 फीसदी हिंदू भाजपा से लड़ रहे हैं, और यदि उनमें से 20 फीसदी भी उनके साथ आ जाते हैं, तो यह लड़ाई पहले ही जीत ली गई समझी जाएगी।

प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं जैसे महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, और समाजवादियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन नेताओं के विचार आज भी भारतीय समाज में गहरे प्रभावशाली हैं। उन्होंने कहा, “हिंदुओं की आधी आबादी गांधी, बाबासाहेब, लोहिया, समाजवाद और कम्युनिस्ट विचारधारा को मानती है। यही लोग स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे, जबकि भाजपा के लोग इस संघर्ष का हिस्सा नहीं थे।”
किशोर ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी को जीत दिलाने में उन्होंने भी अपना योगदान दिया था, लेकिन इसके बाद बिहार में भाजपा के खिलाफ काम करते हुए एक साल के अंदर ही भाजपा को बिहार में महज 55 सीटों तक सीमित कर दिया। इस सफलता का उदाहरण देते हुए उन्होंने अल्पसंख्यक समाज से अपील की कि वे भी जन सुराज की दिशा में सक्रिय रूप से योगदान दें, ताकि बिहार को बदलने की प्रक्रिया में उनका भी महत्वपूर्ण हिस्सा हो।
पटना के अटल पथ पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की गाड़ी पर आक्रोशित लोगों द्वारा पथराव के सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने बिहार के हर वर्ग पर लाठियां चलाई हैं, और अब यह जनता की बारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 20 साल तक शासन में रहने के बाद भी सरकार चुनावों के पहले कई प्रकार की घोषणाएं कर रही है, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने अब तक कोई ठोस काम नहीं किया।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि जन सुराज के प्रयासों से राज्य में पेंशन और मानदेय बढ़ चुका है। उन्होंने कहा, “जन सुराज की व्यवस्था बन गई तो छठ के बाद बिहार का कोई भी युवा 10-12 हजार रुपये के रोजगार के लिए बाहर नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जन सुराज के समर्थन से ही बिहार में बदलाव की दिशा तय होगी, और यह केवल राज्य का नहीं, बल्कि देश का भी भविष्य बदलने की दिशा में एक कदम होगा।
प्रशांत किशोर का यह बयान बिहार और भारतीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। उन्होंने जन सुराज के काम को न केवल बिहार के बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में पेश किया है। उनका यह भी कहना था कि अब बिहार में जनता के पास अपनी आवाज उठाने का अवसर है और जन सुराज इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है।

