पटना, 14 सितम्बर (अशोक “अश्क”) बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा भले ही अब तक नहीं हुई हो, लेकिन चुनावी माहौल तेजी से बनता जा रहा है। राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है, रैलियां, यात्राएं और घोषणाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच, वोट वाइब नामक एक सर्वे एजेंसी ने 3 सितंबर से 10 सितंबर के बीच बिहार में चुनावी मिजाज को लेकर एक बड़ा सर्वे किया, जिसके नतीजे चौंकाने वाले हैं।

इस सर्वे में कुल 5635 लोगों से बातचीत की गई, जिसमें पुरुष 52% और महिलाएं 48% थीं। सामाजिक वर्गों के हिसाब से देखें तो 20% अनुसूचित जाति (SC), 2% अनुसूचित जनजाति (ST), 44% अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 16% ऊंची जाति के हिंदू और 18% मुस्लिम शामिल रहे। शहरी क्षेत्र से 30% और ग्रामीण क्षेत्र से 70% लोगों की भागीदारी रही।
सर्वे का सबसे अहम सवाल था: क्या नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान है? इस सवाल पर 48% लोगों ने साफ तौर पर कहा कि वे मौजूदा सरकार के खिलाफ हैं। वहीं, 27.1% लोगों ने नीतीश सरकार के समर्थन में राय दी। तटस्थ यानी न पक्ष में न विपक्ष में रहने वालों की संख्या 20.6% रही, जबकि 4.3% लोग ऐसे थे जिन्होंने कहा कि वे इस पर कोई राय नहीं बना पाए हैं।
शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में सत्ता विरोधी रुझान एक जैसा रहा। शहरी क्षेत्र में 48% लोगों ने कहा कि वे सरकार से नाराज़ हैं, जबकि 31% ने समर्थन जताया और 17% ने तटस्थ रुख अपनाया। वहीं, ग्रामीण इलाकों में भी 48% लोगों ने सत्ता विरोधी रुख जताया, जबकि 25% समर्थन में और 22% तटस्थ नजर आए।
महिलाओं और पुरुषों की राय भी लगभग एक जैसी रही। दोनों में से 48-48% ने कहा कि वे मौजूदा सरकार से असंतुष्ट हैं। पुरुषों में 29% ने समर्थन किया जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 25% रहा। तटस्थ मत रखने वालों में 20% पुरुष और 22% महिलाएं शामिल थीं। ‘पता नहीं’ या ‘कह नहीं सकते’ कहने वालों में 4% पुरुष और 5% महिलाएं थीं।
यह सर्वे ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ हाल ही में संपन्न हुई है। इस यात्रा के दौरान कांग्रेस और आरजेडी ने बिहार के 22 से अधिक जिलों में लोगों से संवाद किया। हालांकि यह सर्वे यह नहीं बताता कि इससे कांग्रेस या आरजेडी को सीधे तौर पर कितना फायदा होगा, लेकिन यह साफ है कि राज्य में मजबूत एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर है।
इन आंकड़ों से साफ है कि नीतीश कुमार, जो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में हैं, अब जनता के बीच वह समर्थन खोते दिख रहे हैं। खासकर युवा, महिलाएं और ग्रामीण मतदाता अब विकल्प तलाश रहे हैं। सर्वे के अनुसार बिहार में बदलाव की चाहत स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है।

