
शक्ति आराधना और देशभक्ति का अद्भुत संगमश्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सांस्कृतिक संध्या में मां दुर्गा को समर्पित प्रस्तुति,वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ पर विशेष नृत्य ने दर्शकों को किया भावविभोर


उनकी एकल नृत्य प्रस्तुति श्री राजराजेश्वरी अष्टकम पर आधारित थी, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की है। इसके बाद अंबा स्तुति और मां दुर्गा स्तुति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर उनकी प्रस्तुति का आनंद लेते रहे और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विशेष समूह नृत्य प्रस्तुति से हुई। इसमें डॉ. विजयलक्ष्मी ने स्वयं सहभागिता करते हुए कलाकारों का मार्गदर्शन किया और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के पाठ की प्रस्तुति भी सुनिश्चित कराई। इस प्रस्तुति ने सांस्कृतिक गरिमा और राष्ट्रभक्ति का सुंदर संदेश दिया।डॉ. विजयलक्ष्मी का व्यक्तित्व प्रशासनिक दक्षता और सांस्कृतिक समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। बचपन से ही भरतनाट्यम के प्रति उनका गहरा लगाव रहा है, जिसे उन्होंने अपने व्यस्त प्रशासनिक दायित्वों के साथ निरंतर साधना के रूप में बनाए रखा है। विभिन्न मंचों पर उनकी प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय कला की गरिमा को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती रही हैं।उल्लेखनीय है कि डॉ. विजयलक्ष्मी पूर्व में बुद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव, बिहार दिवस समारोह सहित कई राज्य स्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। पिछले वर्ष बिहार दिवस पर यशोधरा पर आधारित उनकी नृत्य प्रस्तुति ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। इन मंचों के माध्यम से उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाई है।इस सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, अधिकारी, कलाकार और नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने बिहार दिवस समारोह को नई गरिमा प्रदान करते हुए कला और संस्कृति के माध्यम से समाज को सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया।

