नई दिल्ली, 10 सितम्बर (अशोक “अश्क”) भारत के नौकरीपेशा युवाओं की सोच में अब बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, युवा अब अपनी आय को अनावश्यक खर्चों पर उड़ाने के बजाय बचत, निवेश और कर्ज चुकाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव आर्थिक समझदारी और भविष्य की सुरक्षा को लेकर उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है।
नौकरी खोजने वाली प्रमुख वेबसाइट Naukri.com द्वारा किए गए इस सर्वे में 20,000 से अधिक नौकरी चाहने वाले लोगों ने भाग लिया, जिनकी सालाना आय 12.75 लाख रुपये तक थी। यह वह आय वर्ग है जिस पर वित्तीय वर्ष 2026 के नए टैक्स नियमों के तहत कोई इनकम टैक्स नहीं लगता।

इस सर्वे में 60% प्रतिभागियों ने बताया कि वे अपनी बची हुई कमाई को बचत और निवेश में लगाते हैं। वहीं, 30% लोग कर्ज चुकाने में इसका इस्तेमाल करते हैं। केवल 9% लोग अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने पर खर्च कर रहे हैं और सिर्फ 4% लोग इसे घूमने-फिरने या मनोरंजन में खर्च करते हैं।
साफ है कि युवा अब अधिक सोच-समझकर और जिम्मेदारी से पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नई टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा बचत कर रहे हैं, जिनमें से 76% अपनी अतिरिक्त कमाई बचा रहे हैं। इसके बाद ऑटो सेक्टर (63%) और फार्मा सेक्टर (57%) के लोग हैं।
वहीं, FMCG (64%) और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (60% से ज्यादा) के कर्मचारी लंबी अवधि की रिटायरमेंट योजना और निवेश पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
जो लोग पहली बार नौकरी कर रहे हैं, वे अपनी टैक्स में बची रकम का 31% जीवनशैली सुधारने और 14% घूमने-फिरने पर खर्च कर रहे हैं। लेकिन, एक साल काम करने के बाद 69% लोग बचत को प्राथमिकता देने लगते हैं, जो कि ताजातरीन ग्रेजुएट्स (34%) के मुकाबले दोगुना से ज्यादा है।
शहरों की बात करें तो दिल्ली (63%) और गुरुग्राम (64%) सबसे ज्यादा बचत करने वाले शहरों में शामिल हैं। चेन्नई के 44% लोग कर्ज चुकाने पर ध्यान देते हैं, जबकि मुंबई में 51% लोग अपनी अतिरिक्त कमाई को रिटायरमेंट फंड में निवेश कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नए इनकम टैक्स नियमों के बारे में सभी को पूरी जानकारी नहीं है।
64% नई नौकरी करने वालों को इनके फायदों की पूरी जानकारी है।
57% अनुभवी (5 साल से ज्यादा) कर्मचारियों ने भी पूरी जानकारी होने की बात कही।
हालांकि, 43% लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें या तो जानकारी नहीं है या वे पूरी तरह से अनजान हैं।
यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि भारत के युवा अब सिर्फ “अभी” नहीं, बल्कि “भविष्य” की सोच के साथ अपने वित्तीय फैसले ले रहे हैं। बचत और निवेश की आदत उनमें तेजी से विकसित हो रही है, जो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएगी, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता में भी अहम भूमिका निभाएगी।

