नई दिल्ली, 29 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारतीय रुप ये की ताकत अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के 34 देशों में इसका सीधा कारोबार शुरू हो गया है। पहले भारत केवल 18 देशों के साथ रुपये में व्यापार करता था, अब यह संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। यह संकेत है कि भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पहले से कहीं ज्यादा स्वीकृति मिल रही है और यह भारत की आर्थिक स्थिति तथा मुद्रा स्थिरता का मजबूत प्रमाण है।

फॉरेक्स एक्सचेंज डीलर एसोसिएशन (FEDAI) द्वारा जारी04/ आंकड़ों को RBI अधिकारियों ने निर्यातकों के साथ साझा किया। निर्यातकों का मानना है कि रुपये में बढ़ता अंतरराष्ट्रीय उपयोग भारत के लिए बहुत फायदेमंद रहेगा। इससे डॉलर पर निर्भरता घटेगी और व्यापार प्रक्रिया आसान होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों में डॉलर पर निर्भरता को लेकर चिंता बढ़ी है। रुपये में व्यापार बढ़ने से लेनदेन लागत घटेगी, बार-बार डॉलर में बदलने का खर्च और जोखिम समाप्त होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर की अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं का व्यापार पर असर अब कम होगा। रुपये में ट्रेडिंग से भारतीय कंपनियों की ग्लोबल प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
रुपये की पहुंच अब एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ओशिनिया के देशों तक फैल चुकी है। प्रमुख देशों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बेलारूस, बेल्जियम, चीन, जर्मनी, जापान, रूस, UAE, USA, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इन देशों में भारतीय रुपये को सीधे स्वीकार किया जा रहा है, जिससे आयात-निर्यात प्रक्रियाएं सरल हो गई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह भारत के लिए वैश्विक आर्थिक सफलता है और रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिर और भरोसेमंद मुद्रा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

