नई दिल्ली, 04 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत की तीनों सेनाएं वर्तमान में पाकिस्तान से सटी गुजरात और राजस्थान की पश्चिमी सीमाओं पर चल रहे त्रिशूल युद्धाभ्यास में व्यस्त हैं। पाकिस्तान में इस विशाल युद्धाभ्यास को लेकर इतनी दहशत फैल गई कि उसने पूरे देश में हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इसे पूर्व चेतावनी भी जारी कर दी थी। यह युद्धाभ्यास 30 अक्टूबर से शुरू हुआ और 10 नवंबर को समाप्त होगा।

इसके ठीक अगले दिन, 11 नवंबर से भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना अरुणाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ों में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ नामक युद्धाभ्यास शुरू करेगी, जो 15 नवंबर तक चलेगा। यह इलाका LAC (चीन-भारत सीमा) से मात्र 30 किलोमीटर दूर स्थित है और विश्व के सबसे संवेदनशील रक्षा क्षेत्रों में गिना जाता है।
इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारतीय सशस्त्र सेनाओं की तैयारियों और मल्टी-डोमेन रेडीनेस का आकलन करना है। इसमें नौसेना की भागीदारी यह दर्शाती है कि अब भारतीय सेना समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी ऑपरेशन कर सकती है। युद्धाभ्यास में स्पेशल फोर्स, अनमैन्ड प्लेटफॉर्म (ड्रोन), प्रिसिजन सिस्टम और कंट्रोल रूम के माध्यम से समन्वित ऑपरेशन शामिल होंगे।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान ‘थिएटर कमांड’ की महत्वाकांक्षी योजना को परखने के लिए किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य थल सेना, वायु सेना और नौसेना को पूरी तरह एकीकृत कर एक मजबूत सैन्य ढांचा तैयार करना है। इस तरह की कवायद पहले भी हुई हैं, जैसे भाला प्रहार (2023) और पूर्वी प्रहार (2024)।
इस बार का युद्धाभ्यास विशेष रूप से तकनीक आधारित युद्ध, ड्रोन से लड़ाई, एआई आधारित सर्विलांस और सैटेलाइट संचार पर केंद्रित है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी सीमा के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी सीमा पर यह युद्धाभ्यास यह संकेत देता है कि भारत दोनों फ्रंट पर एक साथ युद्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

