नई दिल्ली, 01 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत, हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी युद्धपोतों और जासूसी जहाजों की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। इसी बीच, भारतीय नौसेना 15 से 25 फरवरी के बीच विशाखापत्तनम में 55 देशों की नौसेनाओं के साथ ‘मिलन’ समुद्री अभ्यास, अंतर्राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) और इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) की मेजबानी करने की तैयारी कर रही है। इस अभ्यास में अमेरिका और रूस के जहाजों की उपस्थिति पक्की है, जबकि भारत के क्वाड साझेदार जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसमें भाग लेंगे। चीन, पाकिस्तान और तुर्की को इस आयोजन में आमंत्रित नहीं किया गया है।

भारतीय नौसेना उपप्रमुख वाइस एडमिरल संजय वत्यायन ने शुक्रवार को कहा कि हिंद महासागर में बाहरी शक्तियों की उपस्थिति लगातार बनी हुई है और यह स्थिति बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में किसी भी समय कम से कम 40 युद्धपोत सक्रिय रहते हैं, जो कभी-कभी बढ़कर 50 तक हो सकते हैं। नौसेना उनकी हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।
वाइस एडमिरल वत्यायन ने यह भी बताया कि भारत का ऑपरेशन सिंदूर, जो मई में पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किया गया था, अभी भी जारी है। उनका कहना था, “विदेशी देशों के साथ हमारे चल रहे अभ्यासों का संदेश यह है कि हमारी योजनाएं बिना किसी बाधा के पूरी हो रही हैं। हम ऑपरेशन सिंदूर के तहत वर्तमान और भविष्य में भी तैयार और तैनात हैं।”
वहीं, चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी ‘अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस’ को मजबूत कर रहा है। इसके लिए वह लगभग स्थायी रूप से जासूसी जहाजों की तैनाती कर रहा है, जो नेविगेशन और पनडुब्बी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण समुद्री डेटा एकत्र करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभ्यास और IFR की मेजबानी से भारत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा, बल्कि हिंद महासागर में विदेशी शक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की अपनी रणनीति को भी प्रभावी बनाएगा।

