
नई दिल्ली, 19 फरवरी (अशोक “अश्क”) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित दबाव के बीच भारत की ऊर्जा नीति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने दावा किया है कि भारत महंगा अमेरिकी क्रूड खरीद रहा है, जबकि चीन रूस और ईरान से भारी डिस्काउंट पर तेल लेकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है।चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रंप प्रशासन भारत पर रूसी तेल बंद कर अमेरिकी तेल खरीदने का दबाव बना रहा है।

उन्होंने याद दिलाया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी भारत ने अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल आयात लगभग रोक दिया था, जबकि तब ईरान रियायती दरों पर सप्लाई दे रहा था।जानकारों के मुताबिक अमेरिकी तेल, शिपिंग लागत जोड़ने के बाद, मिडिल ईस्ट के तेल से महंगा पड़ता है। इसके बावजूद ‘इंपोर्ट डाइवर्सिफिकेशन’ के नाम पर अमेरिकी हिस्सेदारी बढ़ रही है। 2025-26 में रूस से भारत का आयात घटकर 1.1-1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है, जो पहले 1.8-2 मिलियन था। वहीं फरवरी 2026 में चीन ने रूस से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ज्यादा तेल खरीदा।

हाल ही में ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील में रूसी तेल बंद करने का दावा किया और 25% पेनल्टी टैरिफ हटाने की बात कही। हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर रूस से तेल बंद करने की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऊर्जा नीति राजनीतिक दबाव में रही, तो चीन को सस्ता तेल मिलता रहेगा और भारत महंगे विकल्पों की कीमत चुकाता रहेगा।

