
नई दिल्ली, 10 मार्च (अशोक “अश्क”) इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इसका असर धीरे-धीरे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी की भारी किल्लत पैदा हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

जानकारी के अनुसार खाड़ी देश कतर, जो भारत को प्राकृतिक गैस की सबसे बड़ी आपूर्ति करता है, इस समय गंभीर संकट से जूझ रहा है। ईरान के ड्रोन हमलों के बाद कतर में एलएनजी उत्पादन लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। वहीं हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण जहाजों की आवाजाही भी लगभग रुक गई है। ईरान की ओर से कतर के कई तेल डिपो और रिफाइनरियों पर हमले किए जाने से हालात और भी गंभीर हो गए हैं।इस संकट का सीधा असर भारत के बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में दिखाई दे रहा है।

इन शहरों में कमर्शियल एलपीजी और सीएनजी की सप्लाई प्रभावित होने से गैस स्टेशनों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। रेस्टोरेंट और होटल संचालकों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर होटल बंद करने पड़ सकते हैं।मुंबई होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो शहर के करीब 50 प्रतिशत होटल अगले कुछ दिनों में बंद हो सकते हैं। एसोसिएशन के मुताबिक गैस की कमी के कारण लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं।इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर एलपीजी और पीएनजी सप्लाई से जुड़े हालिया सरकारी आदेश पर चिंता जताई है और जल्द समाधान की मांग की है।

