पटना, 7 सितम्बर (अशोक “अश्क”) बिहार की राजनीति में रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बड़ा सियासी संकेत देते हुए कहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में राघोपुर या करगहर से चुनाव लड़ सकते हैं। खास बात यह है कि राघोपुर वही सीट है, जहां से राजद नेता तेजस्वी यादव दो बार विधायक रह चुके हैं। ऐसे में पीके का यह दांव तेजस्वी यादव के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

राघोपुर, वैशाली जिले में स्थित है और लंबे समय से लालू परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। तेजस्वी के पहले यहां से लालू यादव और राबड़ी देवी भी चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि वर्ष 2010 में जेडीयू के सतीश कुमार ने राबड़ी देवी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था।
जातिगत समीकरण की बात करें तो राघोपुर में यादव और मुस्लिम वोटर करीब 40% हैं, जो राजद का कोर वोट बैंक हैं। लेकिन यहां 15-20% राजपूत और 25% ईबीसी वोटर भी निर्णायक भूमिका में हैं। प्रशांत किशोर ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और गैर-यादव वोटों को साधकर मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। उनका विकासवादी एजेंडा और युवा फोकस उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग बनाता है।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि अगर पीके राघोपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो यह मुकाबला जातिगत नहीं, विकास बनाम वंशवाद की लड़ाई बन सकता है, जिससे बिहार की राजनीति में नई बहस और समीकरण सामने आएंगे।

