
पटना, 03 फरवरी (सेंट्रल डेस्क) झंझारपुरपुर जनता हाई स्कूल बालेश्वर यादव प्लस टू उच्च विद्यालय,पहराजस्थान,खैरा के पूर्व प्रधानाध्यापक एवं वरिष्ठ गणित शिक्षक डॉ. ब्रज किशोर सिंह का 30 जनवरी 2026 को वाराणसी में निधन हो गया। वे सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रहे थे और अपने पुत्रों के साथ वाराणसी में निवासरत थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षाविदों,सहकर्मियों एवं पूर्व छात्रों में शोक की लहर दौड़ गई।

डॉ. सिंह ने दिसंबर 1980 से जुलाई 2014 तक लगभग 34 वर्षों तक विद्यालय में अपनी सेवाएं दी। इस दीर्घकालीन शैक्षणिक यात्रा में उन्होंने ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को क्षितिज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे न केवल एक कुशल गणित शिक्षक थे, बल्कि एक संवेदनशील मार्गदर्शक और अनुशासनप्रिय शिक्षाविद् के रूप में भी जाने जाते थे। सहकर्मियों और विद्यार्थियों के अनुसार, डॉ. सिंह ने गणित जैसे जटिल विषय को सरल, व्यवहारिक और रुचिकर बनाकर प्रस्तुत किया।

उन्होंने विद्यार्थियों में सत्यनिष्ठा,आत्मसम्मान,परिश्रम और नैतिक मूल्यों का संस्कार भी किया। उनके मार्गदर्शन में शिक्षित अनेक विद्यार्थी आज प्रशासन, शिक्षा,उद्यमिता और सामाजिक क्षेत्रों में देश-विदेश में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।डॉ. सिंह के प्रमुख शिष्यों में डॉ. बीरबल झा शामिल हैं,जिन्हें “यंगेस्ट लिविंग लेजेंड ऑफ़ मिथिला” के रूप में जाना जाता है। डॉ. झा ब्रिटिश लिंगुआ के संस्थापक हैं—संचार कौशल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यात संस्था और वे 30 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. बीरबल झा ने कहा,“वे केवल शिक्षक नहीं थे, बल्कि चरित्र-निर्माता थे। सही सोच, सही बोल और सही आचरण का जो पाठ उन्होंने हमें पढ़ाया, वही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।”डॉ. ब्रज किशोर सिंह का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया।

वे अपने पीछे पत्नी, पुत्रों, बहुओं, पुत्री तथा नाती-पोतों से युक्त भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके पैतृक गाँव खैरा तिलई स्थित विद्यालय परिसर में आयोजित शोकसभा में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।शिक्षाविदों ने उनके निधन को मूल्य-आधारित शिक्षा परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया। ग्रामीण भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार हेतु उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

