नई दिल्ली, 5 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) अपने 25वें जन्मदिन को यादगार बनाते हुए हिमाचल प्रदेश के निशाद कुमार ने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2024 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। 3 अक्तूबर 1999 को जन्मे निशाद ने 2.14 मीटर ऊंची कूद लगाकर टी-47 कैटेगरी में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खास बात यह रही कि पहली बार उनके माता-पिता और बहन स्टेडियम में मौजूद थे और उन्होंने अपने लाल को चैंपियन बनते देखा।

इस ऐतिहासिक जीत में सोने पर सुहागा यह रहा कि निशाद ने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके अमेरिका के राड्रिक टांसेंट को पीछे छोड़ा। टांसेंट को इस बार तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के छोटे से गांव बदाऊं से ताल्लुक रखने वाले निशाद बचपन में एक हादसे में हाथ गंवा बैठे थे, लेकिन हौसलों की उड़ान ने उन्हें आज विश्व चैंपियन बना दिया। उन्होंने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में लगातार रजत पदक जीतकर पहले ही देश के लिए गौरव बढ़ाया था।
निशाद के पिता रछपाल सिंह राज मिस्त्री का काम करते हैं और माता पुष्पा देवी गृहिणी हैं। अंब स्कूल से पढ़ाई के बाद निशाद का जुनून उन्हें पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम ले गया, जहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा को तराशा। जमैका के दिग्गज एथलीट उसैन बोल्ट से प्रेरणा लेने वाले निशाद ने दौड़ से शुरुआत की थी, लेकिन बाद में हाई जंप को अपना मुख्य खेल बनाया।
फाजा वर्ल्ड ग्रां प्री में पहला गोल्ड, फिर 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज, टोक्यो और पेरिस में सिल्वर और अब दिल्ली में गोल्ड जीतकर निशाद ने खुद को देश के सबसे भरोसेमंद पैरा एथलीट के रूप में साबित किया है। वर्तमान में वह विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं और अब पेरिस 2028 में स्वर्ण पदक का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

