नई दिल्ली, 9 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) हिंदी सिनेमा के सबसे हैंडसम और करिश्माई अभिनेताओं में शुमार विनोद खन्ना का फिल्मी सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। साल 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ से अपने करियर की शुरुआत की, वो भी विलेन के रूप में। उस दौर में जब नकारात्मक भूमिकाएं करना करियर के लिए जोखिम भरा माना जाता था, विनोद खन्ना ने उस फैसले से इतिहास रच दिया।

विनोद खन्ना का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि सेट के बाहर लड़कियां उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार करती थी। वह राजेश खन्ना की तरह ही दर्शकों के दिलों पर राज करते थे। उनके लुक्स को लेकर खुद मौसमी चटर्जी ने एक इंटरव्यू में कहा था, “वो उस दौर के सबसे हैंडसम हीरो थे। उनके जैसा कोई और नहीं था।”

विनोद खन्ना का करियर बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने नेगेटिव रोल से लेकर लीड हीरो और चरित्र भूमिकाओं तक हर किरदार को बखूबी निभाया। अपने पिता के खिलाफ जाकर उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, लेकिन अपनी मेहनत से पिता का विश्वास जीत लिया।

उनका नाम अक्सर अमिताभ बच्चन के समकक्ष लिया जाता था, क्योंकि वो उन्हें हर स्तर पर टक्कर देते थे। वहीं, अमृता सिंह संग उनका अफेयर भी खूब सुर्खियों में रहा। दोनों ने साथ में कई फिल्मों में काम किया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमृता सिंह उनसे बेहद प्रभावित थीं, लेकिन बताया जाता है कि अमृता की मां को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।
विनोद खन्ना सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक स्टाइल आइकन और दिलों की धड़कन थे, जिन्होंने अपने अभिनय और व्यक्तित्व से बॉलीवुड में अमिट छाप छोड़ी।

