
पटना,डेस्क:-14 अप्रैल:- बिहार में नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के नाम की घोषणा होते ही सियासत तेज हो गई है। जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस फैसले पर कड़ा पलटवार करते हुए भाजपा के “चाल, चरित्र और चेहरा” के दावे पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशांत किशोर ने बिना नाम लिए नए मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि “ज्ञान की भूमि बिहार को भाजपा की ओर से पहली सौगात ऐसा चेहरा दिया गया है, जिसका चाल, चरित्र और चेहरा तीनों ही चर्चा का विषय होना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला बिहार के हित में नहीं, बल्कि बाहरी नियंत्रण की राजनीति का हिस्सा है। पीके ने आगे कहा कि “आज जो यहां मुख्यमंत्री बने हैं, यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की है। असली नियंत्रण दिल्ली में बैठे नेताओं के पास रहेगा।” उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि “बिहार की सरकार का रिमोट कंट्रोल उनके हाथ में रहेगा।”
उन्होंने रोजगार और पलायन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि “भाजपा की प्राथमिकता यह है कि बिहार के लाखों युवा 10-12 हजार रुपये की नौकरी के लिए गुजरात जाते रहें। आने वाले समय में गुजरात के लोग फैक्ट्रियों के मालिक होंगे और बिहार के युवा मजदूर बनकर रह जाएंगे। जनसुराज की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज है और नई सरकार के गठन की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य की सियासत और गरमा सकती है।

