पटना, 09 नवम्बर (पटना डेस्क) बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार आज शाम थम जाएगा। राज्य के 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा। इस चरण में सबसे अधिक ध्यान सीमांचल क्षेत्र पर है, जिसे राजनीतिक रूप से महागठबंधन का गढ़ माना जाता रहा है।

2020 के विधानसभा चुनाव में सीमांचल की 24 सीटों में एनडीए ने 12 सीटें जीती थीं—जिनमें आठ सीटें बीजेपी और चार जदयू के खाते में गईं। एआईएमआईएम ने अमौर, बहादुरगंज, बायसी, जोकीहाट और कोचाधामन सीटें जीतकर बिहार में अपना खाता खोला था, जबकि महागठबंधन केवल सात सीटों तक सीमित रह गया था। उस चुनाव में एआईएमआईएम की सफलता ने आरजेडी और कांग्रेस की परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा दी थी।
सीमांचल के किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिलों में मुस्लिम आबादी 37% से 67% के बीच है। इसी कारण यह इलाका सभी दलों के लिए निर्णायक साबित होता है। 2020 में एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायक बाद में आरजेडी में शामिल हो गए थे, पर इस बार पार्टी अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है।
इस चुनाव में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। एनडीए ने जातीय समीकरण बदलने के लिए नए चेहरों को उतारा है, जबकि महागठबंधन नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क अभियानों के ज़रिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। प्रशांत किशोर की जनसुराज यात्रा ने भी पूर्णिया और अररिया में नया समीकरण बनाया है।
इस बार सीमांचल की 24 सीटों पर कांग्रेस 12, आरजेडी 9, वीआईपी 2 और सीपीआई(एमएल) 1 सीट पर लड़ रही है। वहीं, एनडीए में बीजेपी 11, जदयू 10 और एलजेपी (आर) 3 सीटों पर मैदान में है। एआईएमआईएम पूरे बिहार में 25 सीटों पर किस्मत आजमा रही है।

