नई दिल्ली, 12 अक्तूबर ( अशोक “अश्क”) हिंदी सिनेमा के इतिहास में अशोक कुमार का नाम उन चंद हस्तियों में शुमार है जिन्होंने न केवल अभिनय को एक नई पहचान दी, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की दिशा भी बदली। 13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर में जन्मे अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था। वकील बनने का सपना लेकर चले थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया।

फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने बॉम्बे टॉकीज में एक लैब असिस्टेंट के रूप में की थी। लेकिन 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ के लीड एक्टर के फिल्म छोड़ने पर अशोक कुमार को हीरो बना दिया गया। इसी फिल्म से उनका नाम ‘अशोक कुमार’ रखा गया और यहीं से उनकी नई पहचान बनी।
इसके बाद उन्होंने ‘अछूत कन्या’, ‘किस्मत’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘बंदिनी’, ‘कंगन’ जैसी कई यादगार फिल्मों में अभिनय किया। 1943 की फिल्म ‘किस्मत’ हिंदी सिनेमा की पहली ऐसी फिल्म बनी जिसने 1 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की।
अशोक कुमार ने कई नए चेहरों को मौका दिया, जिनमें देव आनंद, मधुबाला और ऋषिकेश मुखर्जी प्रमुख हैं। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1988) और पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
10 सितंबर 2001 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी सादगी और प्रतिभा आज भी हिंदी सिनेमा में प्रेरणा का स्रोत है।

