पटना (अशोक “अश्क”) बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ है, लेकिन सभी प्रमुख दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। खासकर वे सीटें, जहां पिछले चुनाव में बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला था, राजनीतिक रणनीतियों के केंद्र में हैं। 2020 के चुनाव में बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 7 सीटों पर हार और जीत का अंतर 12 से लेकर 484 वोटों तक रहा था। यही वजह है कि इन सीटों पर आखिरी राउंड तक चुनावी नतीजे स्पष्ट नहीं हो सके थे। अब जब 2025 का चुनाव करीब है, तो एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों इन सीटों पर विशेष फोकस कर रहे हैं।

2020 के चुनाव में सबसे करीबी मुकाबला हिलसा विधानसभा सीट पर देखने को मिला था। जदयू के कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया को 61,848 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद के अत्री मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को 61,836 वोट हासिल हुए। हार-जीत का अंतर मात्र 12 वोटों का रहा। इस सीट पर एलजेपी उम्मीदवार कुमार सुमन सिंह उर्फ रणजीत सिंह को 17,471 वोट मिले, जिससे जदयू को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
रामगढ़ सीट पर राजद के सुधाकर सिंह ने 58,083 वोट पाकर बसपा के अंबिका सिंह को 189 वोटों से हराया। अंबिका सिंह को 57,894 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह 56,084 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
मटिहानी में 2020 में एलजेपी, जदयू और सीपीआईएम के बीच कांटे का मुकाबला हुआ। एलजेपी के राज कुमार सिंह ने 61,364 वोटों के साथ जीत दर्ज की। जदयू के नरेंद्र कुमार सिंह को 61,031 वोट और सीपीआईएम के राजेंद्र प्रसाद को 60,599 वोट मिले। यहां जीत का अंतर 333 वोटों का था। दिलचस्प बात यह रही कि यहां 6,733 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना था, जो कि निर्णायक साबित हो सकता था।
एक अन्य सीट पर जदयू के सुनील कुमार ने 74,067 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि सीपीआई (एमएल) (एल) के जितेंद्र पासवान को 73,605 वोट मिले। जीत का अंतर 462 वोट था। नोटा को यहां 8,010 वोट मिले, जो एक बार फिर हार-जीत के अंतर से कहीं ज्यादा थे।
देहरी विधानसभा सीट पर राजद के फते बहादुर सिंह ने 64,567 वोट प्राप्त कर बीजेपी के सत्यनारायण सिंह (64,103 वोट) को 464 वोटों से हराया। यहां तीसरे स्थान पर राष्ट्र सेवा दल के प्रदीप कुमार जोशी 9,070 वोटों के साथ रहे, जबकि बीएसपी की सोना देवी को 6,027 वोट मिले।
बछवाड़ा सीट पर बीजेपी के सुरेंद्र मेहता ने 54,738 वोटों के साथ सीपीआई के अबधेश कुमार राय को 484 वोटों से हराया। अबधेश को 54,254 वोट मिले थे। इस सीट पर तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार शिव प्रकाश गरीब दास रहे, जिन्हें 39,878 वोट मिले।
बिहार की ये सात सीटें इस बार चुनावी जंग का मुख्य केंद्र बन सकती हैं। बेहद मामूली वोटों से हार-जीत का फैसला होने की वजह से इन सीटों पर उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ स्तर की रणनीति तक, हर पहलू पर गहराई से काम किया जा रहा है। गठबंधनों के लिए यह सीटें ना सिर्फ संख्या बल के लिहाज से अहम हैं, बल्कि इनके नतीजे कई बार चुनाव की तस्वीर भी बदल सकते हैं।

