
पटना डेस्क। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्यों में संचालित सीएचसी में प्रसव कक्ष को मजबूत करने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति,बिहार ने राज्य के 336 चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित लेबर रूम को और भी सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक उपकरणों का विस्तृत गैप एनालिसिस कराने का निर्देश जारी किया है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पाण्डेय द्वारा जारी पत्र में सभी सिविल सर्जनों- सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि चयनित सीएचसी में उपलब्ध संसाधनों और आवश्यक उपकरणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएं। इस पहल का उद्देश्य उन उपकरणों की पहचान करना है, जिनकी कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण प्रसव एवं स्त्री रोग संबंधी शल्य चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत चयनित 336 सीएचसी को प्रथम रेफरल इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में उपलब्ध सभी आवश्यक उपकरणों का वास्तविक आकलन कर उनकी कमी का ब्यौरा तैयार किया जाएगा,ताकि आवश्यक संसाधनों की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
राज्य स्वास्थ्य समिति ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित चेकलिस्ट के आधार पर तैयार की गई गैप एनालिसिस रिपोर्ट पर सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला स्वास्थ्य प्रबंधक व प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर होंगे। इसके बाद यह रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजनी होगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रक्रिया से उपकरणों की कमी दूर करने में तेजी आएगी, जिससे सुरक्षित प्रसव, जटिल गर्भावस्था के बेहतर प्रबंधन और स्त्री रोग संबंधी ऑपरेशन सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसका सीधा लाभ राज्य की लाखों गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को मिलेगा।
-336 चयनित सीएचसी में होगा विस्तृत गैप एनालिसिस
एलडीआर कॉम्प्लेक्स और प्रसूति व स्त्री रोग शल्य चिकित्सा कक्ष को आधुनिक उपकरणों से किया जाएगा सुसज्जित।
-दो सप्ताह के भीतर सभी जिलों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
चयनित सीएचसी को एफआरयू के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने तथा सुरक्षित प्रसव सेवाओं को मजबूत करने पर सरकार विशेष जोर दे रही है। जिसको लेकर ग्रामीण स्तर पर भी सुविधाओं को मजबूत करने की व्यवस्था की जा रही है।

