

पूर्णिया:-20 सितम्बर (राजेश कुमार झा) प्रतिबंधित दवा कोडीन की तस्करी ने पुलिस की नींद उड़ा दी है.शराब और स्मैक की तर्ज पर ही ये कारोबार भी फल-फूल रहा है.आए दिन सैकड़ों कार्टून कोडीन की बरामदगी ने नशे के कारोबार में अपनी एक अलग ही कारोबार को जन्म दे दिया है.जो समाज के लिए एक बहुत बड़ी समस्या पैदा दिया है.बताते चलें कि डॉक्टर मरीज को खांसी या जुकाम होने पर बहुत ही सीमित मात्रा में इसे पीने की सलाह देते थे.लेकिन अब वो डॉक्टर भी कोडीन पीने के लिए नहीं लिखते है. कारण कोडीन से अच्छी-अच्छी और बेहतर दवाइयां बाजार में उपलब्ध हो चुकी है.लेकिन उसके बाबजूद भी कोडीन की बिक्री बाकी दवाइयों से कई गुना अधिक हो रही है.जो कि काफी चिंता का विषय है.बताते चलें कि बीफोरप्रिंट डिजिटल की सर्वे में कोडीन की बिक्री बांकी खांसी-जुकाम की दवाइयों से कई गुना अधिक है.जिसे डॉक्टर भी नहीं लिखते है. उसके बाबजूद कोडीन का इतना बड़ा कारोबार अगर बाजार में हो रहा है तो वो काफी चिंता का विषय है. बताते चलें कि पिछले 5 सालों में कोडीन की बिक्री पिछले 25 सालों में जितनी हुई थी.उससे कई गुना अधिक हुई है.इसका सबसे बड़ा कारण है नशा.नशेड़ी इसे नशा के लिए इस्तेमाल करते है.किसी भी दुकान पर गए और मात्र कुछ रुपयों में ही ये दवा उपलब्ध है.ब्राउन शुगर,स्मैक या शराब के लिए कम से कम 200 रुपए तो लगेंगे ही. लेकिन कोडीन के लिए मात्र 25 रुपए.बताते चलें कि पिछले दिन पुलिस ने 1000 बोतल कोडीन जप्त कर एक तस्कर को गिरफ्तार किया है.सूत्रों से मिली जानकारी के तीन स्टेजों पर चलता है कोडीन का कारोबार.पहला स्टेज कोडीन लाने वाला.दूसरा स्टेज कोडीन रिसीव करने वाला.तीसरा स्टेज उसे डिस्ट्रीब्यूशन तक पहुंचाने वाला.इन सबके ऊपर होता है कोडीन लाखों-करोड़ों रुपए फाइनेंस करने वाला. जिसे इस धंधे का किंगपिन कहा जाता है.
















