
गोपालगंज,संवाददाता। जिले में जब्त वाहनों के सत्यापन, मूल्यांकन और नीलामी से जुड़े मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने अपनी जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में इओयू ने तत्कालीन मोटर वाहन निरीक्षक सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद मामले में कार्रवाई का दायरा और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। इस मामले में ईओयू की ओर से अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इससे पहले 8 अक्टूबर को सिधवलिया थाना के कांड अनुसंधानकर्ता व पुलिस अवर निरीक्षक राजेंद्र राम को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, 14 सितंबर को जिला परिवहन कार्यालय, गोपालगंज के तत्कालीन लिपिक अखिलेश लाल और डाटा एंट्री ऑपरेटर हैदर अली अंसारी को गिरफ्तार किया गया था। लगातार हो रही गिरफ्तारियों से परिवहन एवं पुलिस महकमे में हलचल तेज है।
-जब्ती से नीलामी तक हर कड़ी की पड़ताल
ईओयू की जांच अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। एजेंसी जब्त किए गए वाहनों की जब्ती प्रक्रिया,भौतिक सत्यापन, दस्तावेजों की जांच,बाजार मूल्यांकन और नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया को खंगाल रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि वाहनों की जब्ती और उसके बाद की कार्रवाई में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
सूत्रों के अनुसार,जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर यह भी पड़ताल की जा रही है कि इस पूरी प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर आपसी मिलीभगत या अनियमितता तो नहीं हुई।
-डिजिटल रिकॉर्ड भी ईओयू के रडार पर
मामले में ईओयू की नजर डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्यों पर भी है। कार्यालयीय रिकॉर्ड,वाहन संबंधी दस्तावेज, सत्यापन एवं मूल्यांकन से जुड़े कागजात और नीलामी प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाल रही है।
-आगे और भी गिरफ्तारी के संकेत
आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर आगे अन्य लोगों से पूछताछ,गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लगातार हो रही गिरफ्तारियों से संकेत मिल रहा है कि एजेंसी मामले की तह तक पहुंचने के लिए जब्ती से लेकर नीलामी तक की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है।
















